'सखी बागों में झूला पड़े, चलो री हम झूलन चलें, झूला झूले माता जानकी, झुलावे श्रीराम...।' सावन के महीने में हरियाली तीज का स्वागत महिलाओं ने लोकगीतों, मनोरंजन और श्रृंगार सौंदर्य से किया। शहर भर में हरियाली तीज का त्योहार शनिवार को मनाया जा रहा है। जिसको लेकर शुक्रवार को शहर में हरियाली तीज का हरा रंग उमड़ पड़ा। पार्कों और घरों के बगीचे और छतों पर झूले डाले गए। श्रावणी तीज पर महिलाओं ने विशेष श्रृंगार करने से पहले हाथों, पैरों में मेहंदी लगवाई। शादी के बाद जिन महिलाओं की यह पहली तीज है वे मायके में इस त्यौहार को मना रही हैं। इस पर्व पर गीत गाने का विशेष महत्व है। पढ़ें आगे की स्लाइड्स में...
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खरीदारी करतीं महिलाएं
- फोटो : अमर उजाला
मैचिंग के सूट, साडि़यां बन रहीं पसंद :
हरियाली तीज पर महिलाओं ने हरे रंग के सूट, साड़ी, गाउन व कपड़े खरीदे। कपड़ों के अलावा एसेसरीज व ज्वैलरी में भी महिलाओं ने मैचिंग का विशेष ख्याल रखा। साडि़यों में पेपर सिल्क, कोसा सिल्क, कांजीवरम, ग्लॉस कॉटन, शिफॉन की साडि़यों की विशेष मांग है। हल्के वजन की साडि़यां अधिक पसंद की जा रही हैं। साडि़यों के साथ ही चूड़ी, बिंदी, कंगन, ज्वैलरी को लेकर भी महिलाएं खरीदारी करने बाजार पहुंची।
रचाई नए डिजाइन की मेहंदी :
हरियाली तीज को देखते हुए शुक्रवार को महिलाएं व लड़कियों ने अपने हाथों में मेहंदी लगवाई। इस दौरान महिलाओं के चेहरे पर उत्साह देखा गया। सुंदरपुर स्थित बाजार में मेहंदी लगवा रही रश्मि ने बताया कि उनको हरियाली तीज का बेसब्री से इंतजार रहता है, इसके लिए कुछ पहले से नए कपड़े, ज्वैलरी, साज-श्रृंगार की सारी तैयारी पूरी कर ली है।
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अनीता अग्रवाल
- फोटो : अमर उजाला
भदैनी स्थित अनीता अग्रवाल का शादी के बाद पहला सावन है। वह कहतीं हैं शादी के पहले साल के सभी त्योहार खास होते हैं। इसमें सावन तो बहुत मनोरंजन और उत्साह का पर्व है। हरियाली तीज पर दुल्हन की तरह सजूंगी। सासू मां ने खुद मेरे लिए ब्यूटिशियन और मेंहदी वाले की बुकिंग की है।
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आयुषी अग्रवाल
- फोटो : अमर उजाला
वहीं अस्सी निवासी आयुषी अग्रवाल कहतीं हैं हरे रंग को जीवन और खुशियों का प्रतीक माना जाता है। सुहागिन स्त्रियां हरे रंग की चूड़ियां अपने पति की खुशहाली, तरक्की, दीर्घायु और सेहतमंद जीवन के लिए पहनती हैं।