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Gyanvapi Survey Report : शिवलिंग के फव्वारा होने की बात साबित नहीं, यहां पढ़ें सर्वे रिपोर्ट की खास बातें

Fri, 20 May 2022 08:04 AM IST
अनुराग सक्सेना अमर उजाला ब्यूरो, वाराणसी
अमर उजाला ब्यूरो, वाराणसी Published by: अनुराग सक्सेना Updated Fri, 20 May 2022 08:04 AM IST
सार

मस्जिद के अंदर गुंबद और दीवारों के साथ ही कई जगहों पर स्वास्तिक, डमरू, हाथी के सूंड़, पान, घंटियां सहित देवी देवताओं के प्रतीक मौजूद हैं। कमीशन की रिपोर्ट में स्पष्ट किया गया है कि मुस्लिम पक्ष, जिसे फव्वारा कह रहा है, उसमें पाइप डालने की कोई जगह नहीं है।

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Gyanvapi survey report Shivling being a fountain is not proved read here the special things of the survey report
ज्ञानवापी सर्वे की रिपोर्ट कोर्ट में दाखिल - फोटो : अमर उजाला

श्रृंगार गौरी के नियमित दर्शन-पूजन व अन्य विग्रहों के संरक्षण की मांग पर  ज्ञानवापी मस्जिद में 14 से 16 मई तक विशेष अधिवक्ता आयुक्त विशाल सिंह के नेतृत्व में हुई कमीशन की कार्यवाही की रिपोर्ट में दावा किया गया है कि वजूखाने में मिली आकृति शिवलिंग जैसी है। शिवलिंग के फव्वारा होने की बात साबित नहीं हो सकी है।



मस्जिद के अंदर गुंबद और दीवारों के साथ ही कई जगहों पर स्वास्तिक, डमरू, हाथी के सूंड़, पान, घंटियां सहित देवी देवताओं के प्रतीक मौजूद हैं। कमीशन की रिपोर्ट में स्पष्ट किया गया है कि मुस्लिम पक्ष, जिसे फव्वारा कह रहा है, उसमें पाइप डालने की कोई जगह नहीं है। मौके पर फव्वारा भी नहीं चलाया जा सका था। न्यायालय में दाखिल कमीशन की कार्यवाही की विस्तृत रिपोर्ट को वादी और  प्रतिवादी पक्ष को भी उपलब्ध करा दिया गया है।

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ज्ञानवापी - फोटो : अमर उजाला

शिवलिंग जैसे आकार के ऊपर अलग मैटेरियल का पत्थर

अधिवक्ता आयुक्त विशाल सिंह की रिपोर्ट में बताया गया कि मस्जिद में शिवलिंग जैसे आकार वाली जगह पर पानी निकालने के बाद 2.5 फीट ऊंची और बेस पर चार फीट व्यास की काली गोलाकार पत्थरनुमा आकृति है। इसके शीर्ष पर नौ इंच का गोलाकार सफेद पत्थर अलग से लगा है, जिस पर बीच से पांच दिशाओं में पांच खांचे बने हैं। इस आकृति की सतह पर अलग प्रकार का घोल चढ़ा हुआ प्रतीत हुआ।


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ज्ञानवापी - फोटो : self

फव्वारे पर नहीं मिला सटीक जवाब

न्यायालय में दाखिल रिपोर्ट में दावा किया गया है कि वादी पक्ष के शिवलिंग के दावे पर विशेष अधिवक्ता आयुक्त ने अंजुमन इंतजामिया मसाजिद कमेटी के मुंशी एजाज मोहम्मद से पूछा कि यह फव्वारा कब से बंद है। उनका पहले जवाब आया कि 20 वर्ष और फिर उन्होंने बताया कि 12 वर्ष से बंद है।

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मस्जिद में एक कुआं नजर आ रहा है - फोटो : सोशल मीडिया।

फव्वारा चालू करके दिखाने पर उन्होंने असमर्थता भी जताई। उस आकृति की गहराई में बीचों-बीच सिर्फ आधे इंच से कम का एक ही छेद मिला, जो 63 सेंटीमीटर गहरा था। इसके अलावा कोई छेद उस जगह पर खोजने के बाद भी नहीं मिला। फव्वारे के लिए पाइप डालने की भी जगह नहीं है।

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वायरल वीडियो की स्क्रीनशॉट - फोटो : सोशल मीडिया।

शिवलिंगनुमा आकृति के नीचे नहीं हुई कमीशन की कार्यवाही

वजूखाने के बीच मिले गोलाकार शिवलिंग नुमा आकृति के नीचे भूतल पर जमीन तक आकृति के अस्तित्व का दावा किया गया। मगर इसके नीचे का हिस्सा तहखाने की दीवारों से ढका होने के चलते वहां कमीशन की कार्यवाही नहीं हो पाई है।

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