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गुरु महाराज का 400वां प्रकाशपर्व: काशी में संरक्षित है गुरु तेगबहादुर का चोला कुर्ता और चरण-पादुका

Mon, 15 Mar 2021 04:40 PM IST
गीतार्जुन गौतम न्यूज डेस्क, अमर उजाला, वाराणसी
न्यूज डेस्क, अमर उजाला, वाराणसी Published by: गीतार्जुन गौतम Updated Mon, 15 Mar 2021 04:40 PM IST
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Guru Maharaj 400th Prakashparva: Guru Tegh Bahadur Chola Kurta and Charan Paduka saved in Kashi
गुरु महाराज की चरण पादुका। - फोटो : अमर उजाला

विश्व के इतिहास में धर्म एवं मानवीय मूल्यों, आदर्शों एवं सिद्धांत की रक्षा के लिए प्राणों की आहुति देने वाले गुरु तेगबहादुर का स्थान अद्वितीय है। सिक्खों के नौवें गुरु गुरु तेगबहादुर को हिंदी की चादर के नाम से जाना जाता है। गुरु महाराज का 400वां प्रकाशपर्व राष्ट्रीय पर्व के रूप में मनाया जाएगा। इस दौरान काशी भी रौशन होगी और गुरुबानी का पाठ होगा।



गुरुद्वारा गुरुबाग के मुख्य ग्रंथी भाई सुखदेव सिंह ने बताया कि गुरु तेग बहादुर पंजाब से चलकर दिल्ली, आगरा, मथुरा, कानपुर, प्रयागराज, मिर्जापुर और चुनार होते हुए 1660 ई में काशी पहुंचे। गुरु नानक देव के अनुयायी भाई कल्याण को जब यह जानकारी मिली तो उनके दर्शन के लिए अपने आवास नीचीबाग में तैयारियां की। यहां गुरु तेगबहादुर ने सात माह 16 दिन तक गुरुनानक के उपदेश श्रद्धालुओं को दिए। नीचीबाग गुरुद्वारा के मुख्य ग्रंथी भाई रंजीत सिंह ने बताया कि उनके आगमन के दौरान ही एक घटना घटी। देखें अगली स्लाइ्डस...।

Guru Maharaj 400th Prakashparva: Guru Tegh Bahadur Chola Kurta and Charan Paduka saved in Kashi

पूर्णिमा के दिन कल्याण भाई ने गुरु तेगबहादुर से कहा कि आज सैकड़ों श्रद्धालु काशी गंगा स्नान करने आ रहे हैं। इसलिए आपका आदेश हो तो हम भी गंगा स्नान करके आ जाएं। उन्होंने कहा कि गंगा कितनी दूर हैं। कल्याण भाई ने बताया कि आधा मील। इस पर उन्होंने ध्यान करते हुए घर में रखे एक पत्थर को हटाया। वहां से एक निर्मल जलधार निकल पड़ी।

Guru Maharaj 400th Prakashparva: Guru Tegh Bahadur Chola Kurta and Charan Paduka saved in Kashi
गुरु तेगबहादुर और गुरुनानक देवजी की चरण पादुकाएं - फोटो : अमर उजाला

इसे देख कल्याण भाई आश्चर्य चकित रह गए। जब घर आंगन में पानी भरने लगा तो गुरुजी के आदेश पर पत्थर की शिला रख दी गई। इस जल का स्रोत आज भी गुरुद्वारे में बाऊली साहिब के रूप में मौजूद है। इस जल का अमृत पान करने के लिए लोग दूर-दूर से आते हैं। मान्यता है कि आज भी उस जल के सेवन से कई रोगों से मुक्ति मिलती है।

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Guru Maharaj 400th Prakashparva: Guru Tegh Bahadur Chola Kurta and Charan Paduka saved in Kashi
श्री गुरु तेग बहादुर

जाते समय गुरु महाराज मखमली चोला कुर्ता निशानियां और चरण पादुका छोड़कर चले गए। गुरु की निशानियां आज भी उस गुरुद्वारे में संरक्षित है। इसके दर्शन पूजन के लिए लोग उमड़ते हैं। गुरुद्वारा गुरुबाग के मुख्यग्रंथी भाई सुखदेव सिंह ने बताया कि एक मई को पड़ने वाले प्रकाशोत्सव के लिए आयोजन शुरू हो गए हैं। नियमित रूप से प्रकाशोत्सव तक आयोजन होते रहेंगे।

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कीर्तन से निहाल हुई संगत
गुरुद्वारा गुरुबाग में कीर्तन दीवान सजाया गया। पंथ के रागी जत्था भाई करनैली सिंह एवं भाई नरिंदर सिंह ने गुरुवाणी कीर्तन से संगत को निहाल किया। इस दौरान काफी संख्या में श्रद्धालुओं ने हिस्सा लिया। रविवार को दरबार साहिब अमृतसर वाले रागी जत्था के भाई करनैल सिंह ने कीर्तन से संगत को निहाल किया। मुख्य ग्रंथी भाई सुखदेव सिंह ने गुरुद्वारे में आए संगत को धन्यवाद दिया।

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