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काशी में मैथियास बने परमानंद और डेनियला बनी आनंदमयी, फ्रांस के दंपति ने बताया ये कारण 

Tue, 27 Nov 2018 05:16 PM IST
न्यूज डेस्क,अमर उजाला,वाराणसी
न्यूज डेस्क,अमर उजाला,वाराणसी Updated Tue, 27 Nov 2018 05:16 PM IST
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French couple their change name in varanasi
varanasi - फोटो : amar ujala
भगवान शिव की नगरी काशी में फ्रांस के एक जोड़े ने शिव शक्ति मंत्र की दीक्षा प्राप्त की। इसके बाद दोनों ने अपने नाम बदल लिए। वाग्योग चेतना पीठम में पद्मश्री भागीरथ प्रसाद त्रिपाठी 'वागीश शास्त्री' से शिव शक्ति मंत्र की दीक्षा प्राप्त कर फ्रांस के रहने वाले पेशे से डिजाइनर मेथियस और उनकी पत्नी डेनियला ने हिंदू धर्म अपनाया। दीक्षा प्राप्त करने के बाद उनका नाम और गोत्र परिवर्तित हुआ। मैथियास परमानंद नाथ और आनंदमयी मां बन गईं। आगे की स्लाइड्स में देखें...
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varanasi - फोटो : amar ujala
डेनियला ने बताया कि वे कुंडलिनी साधना के बाद बहुत ऊर्जा महसूस कर रही थी तब उन्होंने और उनके पति ने शिव शक्ति मंत्र की दीक्षा लेने की इच्छा गुरुदेव से प्रकट की। उन्होने बताया कि इस दीक्षा को ग्रहण करने के बाद वह खुद को बहुत ज्यादा ऊर्जावान महसूस कर रही हैं। ईश्वर की साधना कर इस मंत्र का जाप करेगी जिससे उनका और विश्व का कल्याण हो और विश्व में शांति हो। 

 
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varanasi - फोटो : amar ujala
गुरुदेव वागीश शास्त्री ने बताया कि शिव शक्ति मंत्र की साधना प्रसुप्त शक्ति को जागृत करती है और मस्तिष्क विचारों से भर जाता है इससे व्यक्ति को ऊर्जा प्राप्त होती है और नए-नए विचार आते हैं। जो साधक शिव शक्ति मंत्र दीक्षा लेने के बाद निश्चित संख्या में जप करते हैं और उसका दशांश हवन करते हैं उनको वांछित फल की प्राप्ति हो सकती है।

 
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varanasi - फोटो : amar ujala
विश्व से लोग अध्यात्म, योग और तंत्र की साधना प्राप्त करने मेरे पास वर्षों से आते हैं और कुंडलिनी साधना में व्यक्ति अपने चक्रों को जागृत करता है। शिव शक्ति मंत्र साधना से साधक अपने इष्ट को प्रसन्न करता है और वांछित फल प्राप्त कर सकता है।

 
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varanasi - फोटो : amar ujala
वागीश शास्त्री ने यह भी बताया कि परंतु बिना गुरु के दीक्षा के किसी भी मंत्र का प्रभाव नहीं मिलता है। आजकल व्यक्ति बिना गुरु के निर्देशन में कुंडलिनी साधना करते हैं वह उनके लिए उपयुक्त नहीं है और बिना गुरु के निर्देशन में साधना करना उनके लिए घातक हो सकता है। सभी व्यक्तियों को किसी सिद्ध गुरु के निर्देशन में ही कुंडलिनी साधना करनी चाहिए। 

 
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