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Flood Alert: मणिकर्णिका पर तीन शवों का ही अंतिम संस्कार, नक्खीघाट पुल पर आवागमन बंद; काशी में घट रहा पानी

Wed, 06 Aug 2025 07:22 PM IST
अमन विश्वकर्मा अमर उजाला नेटवर्क, वाराणसी।
अमर उजाला नेटवर्क, वाराणसी। Published by: अमन विश्वकर्मा Updated Wed, 06 Aug 2025 07:22 PM IST
सार

वाराणसी में बाढ़ प्रभावित इलाकों में पानी घटने लगा है लेकिन समस्याएं बरकरार हैं। जिला प्रशासन की तरफ से राहत शिविर बनाए गए हैं। यहां लोग जीवनयापन कर रहे हैं। 

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Flood Alert Only three bodies were cremated at Manikarnika traffic stopped on Nakkhighat bridge
बाढ़ प्रभावितों के लिए बनाए गए शिविर। - फोटो : अमर उजाला

गंगा में बाढ़ से शीतला घाट की ओर से दशाश्वमेध प्लाजा से आगे बाढ़ का पानी भरा हुआ है। वहीं मणिकर्णिका घाट पर सतुआ बाबा आश्रम के दरवाजे तक पानी पहुंच चुका है। छतों पर एक साथ तीन से चार शव ही जलाए जा रहे हैं। बाढ़ का पानी फुलवरिया के पहलू का पूरा, इमिलिया घाट के रिहायशी मकानों तक पहुंच गया है। इससे लोगों को घर छोड़ना पड़ा है। इन सबके जेपी मेहता स्कूल में ठहरने के इंतजाम किए गए हैं। 

Flood Alert Only three bodies were cremated at Manikarnika traffic stopped on Nakkhighat bridge
पानी के बीच एक स्थान से दूसरे स्थान पर जाते बाढ़ पीड़ित। - फोटो : अमर उजाला

उधर, वरुणा नदी के जलस्तर में बढ़ोतरी का असर अब शहर के आंतरिक मार्गों पर भी दिखने लगा है। नक्खी घाट-सारंगतालाब मार्ग पर मंगलवार को वरुणा नदी के बैक फ्लो के चलते करीब तीन फीट तक पानी चढ़ गया जिससे इस मार्ग पर आवागमन पूरी तरह ठप हो गया है।

Flood Alert Only three bodies were cremated at Manikarnika traffic stopped on Nakkhighat bridge
सामने घाट पर लगा बाढ़ का पानी। - फोटो : अमर उजाला

नक्खीघाट पुल के पास सड़क पर वरुणा का पानी गलियों और सीवर लाइन के जरिये बैक फ्लो होकर पहुंच गया। नक्खी घाट पुल मार्ग से आवागमन पूरी तरह बंद है। लोग वैकल्पिक रास्तों का उपयोग कर रहे हैं। इस मार्ग पर बाइक, कार, मालवाहक वाहन और यहां तक कि पैदल चलने वालों की भी आवाजाही बंद हो गई है। 

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Flood Alert Only three bodies were cremated at Manikarnika traffic stopped on Nakkhighat bridge
बाढ़ के पानी में स्नान करते शिवभक्त। - फोटो : अमर उजाला

नक्खीघाट मार्ग पांडेयपुर, पंचक्रोशी, अशोक विहार कॉलोनी, लक्ष्मी माता मंदिर और सारनाथ की ओर जाने वालों के लिए मुख्य संपर्क मार्ग है। स्थानीय लोगों का कहना है कि इस मार्ग के आसपास हजारों की आबादी निवास करती है, जो अब असहाय हो गई है। रामनगर के कोदोपुर में गंगा का जलस्तर घर के दरवाजे तक पहुंचा तो लोग दुग्धाभिषेक करने लगे। चिरईगांव में ढाब क्षेत्र सहित चांदपुर, छितौना, मुस्तफाबाद, रेतापार, रामपुर समेत कई गांव बाढ़ से घिर गए हैं। संपर्क मार्ग जलमग्न होने से गांव मुख्य मार्गों से कट चुके हैं। 

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बाढ़ के पानी के बीच पढ़ने जाते बच्चे। - फोटो : अमर उजाला

मुख्य मार्ग से कट चुके गांवों में पहुंचीं नावें : खेतों में डूबे चारे को लाने में भी कठिनाई हो रही है, क्योंकि नाव की व्यवस्था नहीं हो पाई थी।  ग्रामीणों ने नाव की तत्काल व्यवस्था की मांग की। अफसरों ने इसे गंभीरता से लिया और शाम तक आठ नाव पहुंचा दी। 

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