वाराणसी में गंगा के जलस्तर में ठहराव के बाद फिर से बढ़ाव शुरू हो गया है। बुधवार शाम को अस्सी की सड़क पर गंगा का पानी हिलोर लेने लगा था। बाढ़ का पानी अब शहर की ओर बढ़ने से बाढ़ की आशंका तेज हो गई है। पहाड़ों पर हो रही बरसात और बांध से छोड़े गए पानी का असर अब बनारस में नजर आने लगा है। जलस्तर में तीन सेंटीमीटर प्रति घंटे की रफ्तार से बढ़ाव जारी है और जलस्तर चेतावनी बिंदु 70.26 मीटर से 72 सेंटीमीटर नीचे 69.54 मीटर दर्ज किया गया। नदी विशेषज्ञों का कहना है कि गंगा के जलस्तर में और बढ़ाव होगा।
उत्तराखंड व मध्यप्रदेश में हुई बारिश के कारण नदियां उफान पर हैं। धौलपुर बैराज व माता टीला डैम से लगभग 11 लाख क्यूसेक पानी छोड़ा गया है। इससे गंगा में बाढ़ आने की आशंका बनी हुई है। चंबल नदी पर बने धौलपुर बैराज से लगभग सात हजार क्यूसेक पानी छोड़ा गया है। बेतवा नदी पर बने माता टीला डैम से लगभग चार लाख क्यूसेक पानी छोड़ा गया है। इसके प्रवाह का प्रभाव गंगा में जल्द ही नजर आएगा। चंबल नदी के कारण गंगा बढ़ाव पर है। चंबल नदी में इन दिनों 1996 के बाद दूसरी बार बाढ़ आई हुई है।
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अस्सी घाट के पास सड़क पर आया गंगा का पानी
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बुधवार सुबह से ही गंगा का जलस्तर बढ़ना शुरू हो गया था। देर शाम गंगा का पानी अस्सी घाट के मुहाने तक जाने वाली सड़क पर हिलोरे मारने लगा। गंगा में बढ़ाव से वरुणा में भी पलट प्रवाह फिर शुरू हो गया है। गंगा सहित वरुणा तटवासी अब बाढ़ की संभावनाओं के चलते सहम हुए हैं।
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अस्सी घाट का नजारा
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केंद्रीय जल आयोग के बाढ़ बुलेटिन के अनुसार बुधवार सुबह आठ बजे गंगा का जलस्तर 69.19 मीटर था। जलस्तर बढ़ने की रफ्तार तेज हुई और तीन सेंटीमीटर प्रति घंटे की रफ्तार से जलस्तर बढ़ने लगा और शाम सात बजे 69.51 मीटर और रात आठ बजे 69.54 तक जलस्तर पहुंच गया।
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हरिश्चंद्र घाट पर गंगा का जलस्तर
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गंगा की सहायक नदी वरुणा भी शहरी इलाकों में अपना पैर पसार रही है। शहर के बीच से निकली वरुणा के पलट प्रवाह से अब तक दर्जनों इलाकों और कॉलोनियां डूब चुकी हैं। तटवर्ती इलाके में रहने वाले लोग वरुणा के कहर से परेशान हैं। दरअसल, बाढ़ के कारण एक तरफ जहां गंगा उफान पर है, तो वहीं वरुणा ने भी आम जनजीवन को अस्त व्यस्त कर दिया है।
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नक्खी घाट इलाके में बाढ़ का पानी
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सरैयां, कोनिया, सलारपुर, तातेपुर, शैलपुत्री तीनपुलउवा, धोबिया घाट, उचवा, दीनदयालपुर, नक्खीघाट, हिदायत नगर, तालीम नगर, अंसार नगर, बिछुआ घाट, हुकुलगंज, मौजा हाल बघवानाला क्षेत्र की स्थिति बदतर हो चुकी है। बाढ़ में फंसे लोग या तो राहत शिविर में परिवार के साथ दिन काट रहे हैं या फिर मकान की छतों पर तिरपाल लगाकर जैसे-तैसे रह रहे हैं।