वाराणसी के हाई प्रोफाइल केस को पुलिस सुलझाने में लगी हुई है। टैगोर टाउन की डॉ. रीना सिंह के मौत की सच्चाई जानने के लिए पुलिस अब क्राइम सीन रिक्रिएट करने वाली है। आत्महत्या और हत्या के बीच फंसे इस मामले में पुलिस अभी तक आरोपी पति डॉ. आलोक का पता लगाने में असफल रही है। वहीं पुलिस ने शुक्रवार को डॉ. रीना सिंह के ससुरालियों और बेटियों का बयान दर्ज किया। पढ़ें आगे की स्लाइड्स में...
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डॉ. रीना सिंह (फाइल फोटो)
- फोटो : अमर उजाला
डॉ. रीना की मौत के 10 दिन बाद शुक्रवार को पति डॉ. आलोक के परिजन सामने आए। डॉ. आलोक के चाचा जौनपुर के नेवढ़िया थाना के अटरिया निवासी रजनीश कुमार सिंह ने कहा कि हमारे भतीजे, भाई और भाभी पर हत्या का गलत आरोप लगाया गया है। हम सभी बहू के क्रियाकर्म में व्यस्त थे, इस वजह से अपनी बात किसी के सामने नहीं रख पाए।
रजनीश ने बताया कि दोनों की शादी 2004 में हुई थी और अस्पताल, घर की जमीन, फॉर्च्यूनर गाड़ी सब कुछ रीना के नाम है। शादी के बाद ससुराल से ही रीना ने बीएचयू से एमडी की पढ़ाई की। रीना कुछ वर्षों से अवसाद ग्रस्त रहती थी और बीएचयू अस्पताल में उनका उपचार चल रहा था। रजनीश ने पुलिस से मांग की कि डॉ. आलोक के घर लगे सीसी कैमरे की फुटेज, रीना के सुसाइड नोट और घर के सदस्यों के साथ ही काम करने वालों के बयान के आधार पर पुलिस निष्पक्ष तरीके से जांच करे।
डॉ. रीना की आठ और सात वर्षीय दो बेटियों ने शुक्रवार को वीडियो कैमरे के सामने कैंट पुलिस को बयान दिया। बेटियों ने कहा कि हमारे सामने मम्मी-पापा का झगड़ा कभी नहीं होता था। एक जुलाई को हम मम्मी-पापा के साथ अपने दादा-दादी के पास गांव गए थे और शाम तक वापस लौट आए थे। हमें नहीं पता कि रात में मम्मी के साथ क्या हुआ।
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सीसीटीवी फुटेज में छत से गिरतीं डॉ. रीना
- फोटो : अमर उजाला
वहीं, डॉ. आलोक के वाहन चालक बबलू सिंह ने बताया कि वह जौनपुर स्थित पैतृक आवास से परिवार को बनारस लेकर आया तो रास्ते भर सब कुछ सामान्य था। इसके बाद डॉ. आलोक को लेकर अन्य जगहों पर भी गया, तब भी ऐसा नहीं लगा कि वह किसी बात को लेकर तनाव में हैं।