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देवशयनी एकादशी : क्षीरसागर में शयन पर गए भगवान विष्णु, चार माह तक इन बातों से करें परहेज
न्यूज डेस्क, अमर उजाला, वाराणसी
Updated Wed, 25 Jul 2018 10:26 AM IST
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- फोटो : vishnu
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आषाढ़ शुक्ल पक्ष की एकादशी को देवशयनी एकादशी कहते हैं। इसी रात्रि से भगवान विष्णु का शयन काल आरम्भ हो जाता है इसीलिए इसे हरिशयनी एकादशी भी कहते हैं। यह दिन विष्णु उपासना का है इसलिए भगवान विष्णु का ध्यान और पूजन करें।
puja aarti
भगवान विष्णु के चार महीने तक क्षीरसागर में शयन के लिए जाने के कारण सभी शुभ काम बंद हो जाएंगे। आषाढ़ मास के शुक्ल पक्ष में पड़ने वाली देवशयनी एकादशी से चार महीने तक सभी मांगलिक कार्यों पर रोक लग जाएगी। हरिशयनी एकादशी 23 जुलाई से लेकर 19 नवंबर तक शहनाई नहीं गूंजेगी।
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देवशयनी एकादशी के बारे में बीएचयू के ज्योतिषाचार्य पं. गणेश मिश्र का कहना है कि श्रावण, भाद्रपद, अश्विन और कार्तिक ये चार माह ऐसे हैं, जिनमें देवतागण शयन अवस्था में रहते हैं। उसकी शुरुआत देवशयनी एकादशी से ही होती है। यह देवशयनी एकादशी इस बार 23 जुलाई यानी सोमवार को है।
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इस दिन एकादशी तिथि का प्रारंभ वैसे तो 22 जुलाई की दोपहर 2 बजकर 45 मिनट से हो रहा है, जिसकी समाप्ति 23 जुलाई शाम 4 बजकर 23 मिनट पर होगी। 22 जुलाई को एकादशी लगने के बाद भी इसका मान 23 जुलाई को ही होगा। इस दिन से 4 माह तक किसी भी तरह का शुभ कार्य नहीं होगा।
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इस एकादशी से ही देवतागण शयन अवस्था में रहते हैं और श्री हरि विष्णु अपना देवस्थान छोड़कर विश्राम के लिए क्षीरसागर में शेषनाग पर विश्राम करने चले जाते हैं। यहां पर 4 माह तक वह आराम करते हैं और इसके बाद कार्तिक मास में वह नींद से उठकर अपने भक्तों को दर्शन देते हैं।