बलिया में छठ पर्व धूमधाम से मनाया जा रहा है। परिवार में सुख शांति और संपन्नता के लिए महिलाओं ने शुक्रवार को निर्जला व्रत रखा। शाम को स्नान के बाद शृंगार कर पारंपरिक गीत ‘कांच ही बांस के बहंगियां, बहंगी लचकत जाए’ गाती हुई तालाब, सरोवर, गंगा, सरयू, तमसा और मगई नदी के तटों पर प्रस्थान किया। व्रती महिलाओं ने तालाब, सरोवर, नदी आदि में पूजन किया। इसके बाद अस्ताचलगामी सूर्य को अर्घ्य दिया। अगली स्लाइड में भी देखें...
2 of 8
छठ पर्व पर महावीर स्थित घाट की ओर जाती व्रती महिलाएं।
- फोटो : अमर उजाला।
व्रती महिलाएं शुक्रवार की शाम तीन-चार बजे से अपने-अपने घरों से टोली बनाकर घाट के लिए निकलीं। इस दौरान पारंपरिक गीत ‘कांच ही बांस के बहंगियां, बहंगी लचकत जाए’। ‘हथवा में फुलवा डलिया छठ पूजन जाय, छठी मइया होइहे सहइया छठ पूजन जाय’ । ‘उग हो सूूूरुज देव भीन भिनसरवा, अरघ के बेरवा, पूजन के बेरवा हो’। ‘सुगना के मरबो तीर धनुहिया’। छठी माई के घाटवा पे आज बाजन.. गुनगुनाते हुए घाटों पर पहुंचीं।
3 of 8
नगर के शनिचारी मंदिर स्थित छठ घाट पर पूजन करतीं महिलाएं।
- फोटो : अमर उजाला।
शाम होते होते घाटों पर श्रद्धालुओं का जमघट लग गया। आलम ये रहा कि घाटों पर पैर रखने तक की जगह नहीं रही। इस दौरान व्रती महिलाओं ने सरोवर, पोखरा, रताला, गंगा, घाघरा, तमसा नदी के तट पर पहुंच भगवान भास्कर का पूजन-अर्चन किया। कुछ व्रती महिलाओं ने तालाब, सरोवर, नदी आदि में खड़े होकर पूजन किया। इसके बाद अस्ताचलगामी सूर्य को अर्घ्य दिया।
4 of 8
शनिचारी मंदिर स्थित छठ घाट पर पूजन-अर्चन करतीं महिलाएं।
- फोटो : अमर उजाला।
इस दौरान नगर से लेकर ग्रामीण क्षेत्र के विभिन्न घाटों पर आस्था का सागर हिलोरे मार रहा था। शनिवार को व्रती महिलाएं उदीयमान सूर्य का पूजन-अर्चन करने के बाद अर्घ्य देंगी। सुरक्षा व्यवस्था के मद्देनजर जिले के सभी थानों की फोर्स अपने-अपने क्षेत्र में भ्रमण करती रही। इसके अलावा खुफिया विभाग के अधिकारी और कर्मचारी भी सादे वेेश में भ्रमण करते नजर आए।
5 of 8
नगर के बिचला घाट पर पूजन करतीं महिलाएं।
- फोटो : अमर उजाला।
नगर से लेकर ग्रामीण क्षेत्र के तालाब, पोखरा, सरोवर, गंगा, सरयू, तमसा व मगई नदी के घाटों पर विभिन्न समितियों द्वारा सजावट और प्रकाश आदि की समुचित व्यवस्था की गई थी। शहर में नगर पालिका की ओर से टाउन हाल, रामलीला मैदान, शनिचरी मंदिर, महावीर घाट पर झालरों की व्यवस्था की गई थी। इसके अलावा नगर के लाटघाट, हाइडिल कालोनी, बहादुरपुर और नगर से सटे निधरिया, अगरसंडा, मिड्ढा के घाटों पर सजावट प्रधानों की तरफ से कराई गई थी।