बीएचयू में अंतर-संकाय युवा महोत्सव स्पंदन के तीसरे दिन 15 मुख्य प्रतियोगिताएं अलग-अलग सभागारों में हुईं। इसमें एक्सप्रेशन, माइम, लघु नाटक, मिमिक्री, शास्त्रीय एकल गायन के साथ ही कार्टूनिंग, स्केचिंग और रंगाली प्रतियोगिताएं शामिल थीं। चेहरे पर मेकअप, पेंटिंग कर जनजातीय वेशभूषा में आईं छात्राओं और उनके बैकग्राउंड को एक साथ देख लगा कि मंच पर दुर्गा और काली के रूप में कोई डांस करती हुई ड्रॉइंग हो। उन्होंने दुर्गावतार में दर्शकों को दर्शन भी दिया। ये प्रस्त़ुति साउथ कैंपस की छात्राओं ने दी। उन्होंने केरल का थेय्यम नृत्य प्रस्तुति किया।
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बीएचयू में अंतर-संकाय युवा महोत्सव स्पंदन
- फोटो : अमर उजाला
इसी तरह कला संकाय ने ओडिशा का संबलपुरी नृत्य, वाणिज्य संकाय ने झारखंड के जनजातीय नृत्य तो आर्य महिला पीजी कॉलेज ने पूर्वांचल की होली नृत्य की प्रस्तुति दी।
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वसंत कन्या महाविद्यालय ने गिद्दा, दृश्य कला संकाय ने बिहार का मुखौटा नृत्य, एमएमवी ने गरबा, एसवीडीवी ने बंगाल का संथाली, शिक्षा संकाय ने कश्मीर का धुमहाल नृत्य, विधि संकाय ने बंगाली लोक शैली में मां दुर्गा और मां काली की भक्ति-भावना का मंचन किया।
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मोबाइल की लत और चिकित्सकों पर अंधविश्वास का मंचन
एक्सप्रेशन प्रतियोगिता में अधूरी जानकारी खतरनाक होती है, नीम हकीम खतरा-ए-जान, वसुधैव कुटुंबकम, मोबाइल की लत, जब जागो तभी सवेरा और जल ही जीवन है का भाव दिखा। अकबर को शासन के स्थान पर रील बनाते हुए दिखाया गया जो कि मोबाइल की लत पर तीखा व्यंग्य था।
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अन्य प्रस्तुतियों में स्वयंभू चिकित्सकों पर अंधविश्वास, पर्यावरण संरक्षण, मोहिनी और अर्धनारीश्वर जैसे पात्रों को खूब जीया। 13 टीमों ने पांच-पांच मिनट की मूक प्रस्तुतियां दीं। रानी दुर्गावती के जीवन प्रसंग, सेव नेचर और विष्णु के दशावतार जैसे पौराणिक चित्रण शामिल थे।