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शहीदी दिवसः भगत सिंह का बनारस से रहा है खास कनेक्शन, आप भी जानिए
न्यूज डेस्क, अमर उजाला, वाराणसी
Updated Fri, 23 Mar 2018 03:54 PM IST
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bhagat singh
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देश को अंग्रेजों की गुलामी से आजादी दिलाने में अहम भूमिका निभाने वाले क्रांतिकारी भगत सिंह को आज ही के दिन यानी 23 मार्च 1931 को फांसी दी गई थी। भगत सिंह का जन्म 28 सितंबर 1907 को हुआ था। भगत सिंह का बनारस से भी नाता रहा है। आगे की स्लाइड्स में देखें...
सुखदेव
पहली बार बनारस में भगत सिंह की मदद शचीन्द्र नाथ सान्याल ने की थी। काशी में पैदा हुए सान्याल अपने समय के सम्मानित क्रांतिकारियों में थे। उन्होंने हिन्दुस्तान रिपब्लिकन एसोसिएशन की स्थापना की थी। महात्मा गांधी द्वारा 1922 में असहयोग आंदोलन वापस लेने के बाद देश के युवाओं को इस संगठन ने राह दिखाने का काम किया था।
महान क्रांतिकारी राजगुरु
1924 में भगत सिंह ने भी इसकी सदस्यता ग्रहण की थी। इसी के माध्यम से उनकी मुलाकात चंद्रशेखर आजाद, राजगुरु, सुखदेव, राम प्रसाद बिस्मिल आदि क्रांतिकारियों से हुई थी। विवाह प्रस्ताव के बारे में भी शचींद्र शान्याल के मार्गदर्शन के बाद भगत सिंह की दुविधा दूर हुई थी।
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भगत सिंह, राजगुरू, सुखदेव
इसके अलावा महामना मदन मोहन मालवीय को जब भगत सिंह, राजगुरु और सुखदेव के लिए फांसी की सजा का पता चला तो वो भी पूरे देश की तरह बेचैन हो गए। इसके बाद 14 फरवरी 1931 को वो खुद लॉर्ड इरविन के पास एक दया याचिका लेकर गये। इसमें उन तीनों की फांसी पर रोक लगाने और उनकी सजा को कम करने का आग्रह किया गया था।
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bhagat singh
- फोटो : सोशल मीडिया
भगत सिंह और राजगुरु की पहली मुलाकात भी संभवत: बनारस में ही हुई थी। यह पहली मुलाकात इतनी मजबूत थी कि मौत भी इसे तोड़ न सकी। हिन्दुस्तान रिपब्लिकन एसोसिएशन ने जयदेव कपूर को संगठन को मजबूत करने के लिए बनारस भेजा था। इसी समय भगत सिंह भी बनारस पहुंचे और जय देव के साथ कुछ दिनों के लिए लिम्डी हास्टम में ठहरे।