पतझड़ के बाद पेड़ की डालियों पर नई कोपलें फूटने लगीं है।सरसों के खेत पीले हो गए हैं। आम के महमहाते बौर और महुआ के डोंगी पोर-पोर में मादकता घोलने लगी है। प्रकृति का यह नया रूप-निखार हर जेहनोदिल में ऋतुराज वसंत की दस्तक का अहसास लेकर आ गया है। हर मन में उल्लास, पछुआ की हिलोर से झूमती पुरवाई तक मदहोश कर देने वाली खुशबू लाल, पीले, नीले फूलों के चटख रंगों के साथ जल्द ही प्रकृति के आंचल में छिटक जाएगी।
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खेतों में लहलहाने लगे सरसों के फूल
- फोटो : अमर उजाला
उमंग-तरंग, उल्लास और मादकता की आहट दिलों में नया एहसास भरने लगी है। ढोल-झांझ के साथ फाग गाने के लिए टोलियां भी तैयार हो गई हैं। फागुनी बयार के बीच फाग के बोल वसंत पंचमी से गूंजने लगेंगे। हालांकि अब इस तरह की परंपरा शहरों में कुछ कमजोर हुई है। फिर भी मंदिरों और घरों में फागों पर लय-ताल का जुनून देखने को मिलेगा।
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मां सरस्वती
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माघ महीने की शुक्ल पंचमी को पड़ने वाली वसंत पंचमी का हिंदू धर्म में विशेष महत्व है।इस दिन विधि-विधान से मां सरस्वती की पूजन होती है। इसी दिन से ही रंगों के पर्व होली की औपचारिक शुरूआत भी हो जाती है।
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सरसों के खेत पीले हो गए हैं।
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होलिका दहन के लिए होलिका गाड़ने के लिए गांवों में घर-घर जाकर लकड़ी मांगने, बसंत पंचमी के दिन से ही हर दिन शाम को एक जगह एकत्र होकर फगुआ गाने जैसी परंपरा भी गायब सी हो गई है।
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वसंतोत्सव के रंग
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वसंत पंचमी पर काशी हिंदू विश्वविद्यालय में एक अलग ही छटा देखने को मिलेगी। अलग अलग संकायों, संस्थानों और केंद्रों की ओर से 30 झांकियों की शोभायात्रा निकलनी है। हास्टल मार्ग बिरला चौराहे से लेकर एलडी गेस्ट हाउस चौराहा और मालवीय भवन पर महामना को नमन करती झांकियों की ये शोभायात्रा बीएचयू के स्थापना स्थल तक जाएंगी।