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जिसकी खुशबू और मिठास दीवाना बना दे वो है लंगड़ा आम, जानिए कैसे पड़ा ये नाम

Tue, 27 Feb 2018 12:04 PM IST
न्यूज डेस्क, अमर उजाला,वाराणसी
न्यूज डेस्क, अमर उजाला,वाराणसी Updated Tue, 27 Feb 2018 12:04 PM IST
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banarasi langra aam or mango get its name history
langraa aam - फोटो : self

मुंह में स्वाद और मिठास घोल देने के लिए लंगड़ा आम का सिर्फ नाम ही काफी है। गर्मी शुरू होते ही आम की मीठी सुगंध जैसे हवाओं में घुल जाती है। बनारसी लंगड़ा की मिठास और महक के दीवाने विदेशों तक हैं।  लंगड़ा से लेकर दशहरी तक और तोतापरी से लेकर केसर तक, हर आम के पीछे एक खास कहानी और बात है। लंगड़ा आम की उत्पति बनारस से हुई है। आइये आज आपको बताते हैं आम का नाम लंगड़ा कैसे पड़ा?....

 
banarasi langra aam or mango get its name history
langraa aam - फोटो : अमर उजाला
वैसे तो  देश-दुनिया में बनारस कई चीजों के लिए मशहूर है। उन्हीं में एक है आम की प्रजाति बनारसी लंगड़ा। यह प्रसिद्ध किस्म कभी वाराणसी जिले में छह हजार हेक्टेयर तक फैली थी लेकिन समय के साथ इसकी उपज सिमटती गई। फिलहाल तकरीबन 1700 हेक्टेयर में बनारसी लंगड़ा की उपज होती है। 


 
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langraa aam - फोटो : self

बनारसी लंगड़ा, आम के शौकीनों के लिए बस इसका नाम ही काफी है। जिक्र आते ही उन्हें जुबां पर इसकी मिठास घुलने सा अहसास होने लगता है। फलों के राजा आम की इस बेहद खास प्रजाति के शौकीनों के लिए अबकी अच्छी खबर यह है कि इस समय इसके पेड़ बौर से लद गए हैं। बौर की बहार से अबकी बेहतर पैदावार की उम्मीद जताई जा रही है। 


 
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langraa aam - फोटो : twitter


बनारस के चिरईगांव में इसकी सबसे अधिक पैदावार होती है। आराजीलाइन, काशी विद्यापीठ, हरहुआ, बड़ागांव, सेवापुरी सहित आठों ब्लॉकों में इसके बगान हैं। जिला उद्यान अधिकारी संदीप कुमार गुप्ता ने बताया कि जिले में 1700 हेक्टेयर रकबे में बनारसी लंगड़ा आम के बगान हैं। 
 
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आम का बगीचा

किवदंतियों के अनुसार, ढाई सौ साल पहले शहर के एक शिव मंदिर में कोई साधु आए। मंदिर के पुजारी के आग्रह पर कुछ दिन वहीं ठहर गए। इस दौरान साधु ने मंदिर परिसर में आम का एक पौधा लगाया। जाते समय पुजारी को उस आम के पेड़ की देखभाल करते रहने को कहा। पुजारी ने वैसा ही किया। 
 
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