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वाराणसी की कुसुमावती को पंद्रह साल की उम्र से पड़ी बालू खाने की आदत, 80 साल पर भी नहीं छूटी

Wed, 11 Dec 2019 10:25 PM IST
गीतार्जुन गौतम न्यूज डेस्क, अमर उजाला, वाराणसी
न्यूज डेस्क, अमर उजाला, वाराणसी Published by: गीतार्जुन गौतम Updated Wed, 11 Dec 2019 10:25 PM IST
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80 year old woman eating everyday soil mitti in varanasi
कुसुमावती देवी - फोटो : अमर उजाला।

मात्र पंद्रह साल से वाराणसी की कुसुमावती देवी को बालू खाने की आदत हो गई जो 80 की उम्र पर भी नहीं छूटी। वह हर दिन नाश्ता करती हैं, खाना खाती हैं, लेकिन बाद में बालू का भी सेवन कर लेती हैं। उधर, चिकित्सक बालू के सेवन को खतरनाक मानते हैं। उनका कहना है कि बालू से पेट संबंधी बीमारियां होने का खतरा रहता है।

 

80 year old woman eating everyday soil mitti in varanasi
कुसुमावती देवी

चोलापुर ब्लॉक के कटारी गांव की कुसुमावती के परिजनों के मुताबिक, 15 साल की उम्र में उन्हें पेट में दर्द हुआ तो एक वैद्य ने कुसुमावती को गाय के दूध में बालू मिलाकर पीने को कहा। इससे बीमारी तो ठीक हो गई, लेकिन बालू खाने की आदत बन गई।

80 year old woman eating everyday soil mitti in varanasi
कुसुमावती देवी

वह अब भी बालू लाकर पहले उसे साफ पानी से धुलती हैं, फिर सुखाकर खा लेती हैं। उनकी आदत का अब घर के लोग भी विरोध नहीं करते हैं। सोशल मीडिया पर उनकी बालू खाते हुए फोटो भी खूब वायरल हो रही है।

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कुसुमावती देवी

स्वस्थ रहना है तो न खाएं बालू

पेट संबंधी बीमारी में बालू खाने से बीमारी दूर हो जाएगी, आयुर्वेद में ऐसी कोई चिकित्सा पद्धति नहीं है। बालू पाचन तंत्र को कमजोर करती है।
वैद्य सुशील दूबे, बीएचयू आयुर्वेद संकाय

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कुसुमावती देवी

ऐसी घटना पहली बार सुनने में आ रही है। आयुर्वेद में बालू खाकर इलाज के बारे में कुछ नहीं लिखा है। बालू खाने के बाद कुछ पचेगा ही नहीं।
डॉ. अजय कुमार, राजकीय आयुर्वेद महाविद्यालय, चौकाघाट

बालू में पत्थर के टुकड़े होते हैं जो पचाए नहीं जा सकते हैं। बालू खाने की वजह से पेट संबंधी बीमारियां होने की संभावना अधिक हो जाती है।
डॉ. एके सिंह, फिजीशियन, मंडलीय अस्पताल


 

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