वाराणसी की कुसुमावती को पंद्रह साल की उम्र से पड़ी बालू खाने की आदत, 80 साल पर भी नहीं छूटी
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चोलापुर ब्लॉक के कटारी गांव की कुसुमावती के परिजनों के मुताबिक, 15 साल की उम्र में उन्हें पेट में दर्द हुआ तो एक वैद्य ने कुसुमावती को गाय के दूध में बालू मिलाकर पीने को कहा। इससे बीमारी तो ठीक हो गई, लेकिन बालू खाने की आदत बन गई।
वह अब भी बालू लाकर पहले उसे साफ पानी से धुलती हैं, फिर सुखाकर खा लेती हैं। उनकी आदत का अब घर के लोग भी विरोध नहीं करते हैं। सोशल मीडिया पर उनकी बालू खाते हुए फोटो भी खूब वायरल हो रही है।
स्वस्थ रहना है तो न खाएं बालू
पेट संबंधी बीमारी में बालू खाने से बीमारी दूर हो जाएगी, आयुर्वेद में ऐसी कोई चिकित्सा पद्धति नहीं है। बालू पाचन तंत्र को कमजोर करती है।
वैद्य सुशील दूबे, बीएचयू आयुर्वेद संकाय
ऐसी घटना पहली बार सुनने में आ रही है। आयुर्वेद में बालू खाकर इलाज के बारे में कुछ नहीं लिखा है। बालू खाने के बाद कुछ पचेगा ही नहीं।
डॉ. अजय कुमार, राजकीय आयुर्वेद महाविद्यालय, चौकाघाटबालू में पत्थर के टुकड़े होते हैं जो पचाए नहीं जा सकते हैं। बालू खाने की वजह से पेट संबंधी बीमारियां होने की संभावना अधिक हो जाती है।
डॉ. एके सिंह, फिजीशियन, मंडलीय अस्पताल