मंच पर खड़े होकर कार्यकर्ताओं के सामने कान पकड़कर उठक-बैठक करने और बुजुर्ग मतदाता की तेल-मालिश करने वाले भाजपा प्रत्याशी भूपेश चौबे का डंका फिर से बजा है। सोनभद्र के रॉबर्ट्सगंज सीट से लगातार दूसरी बार उन्होंने जीत दर्ज की। भूपेश चौबे को 84352 मत मिला, जबकि सपा के उम्मीदवार अविनाश कुशवाहा को 78449 मत प्राप्त हुआ।
इस तरह भूपेश चौबे 5905 मत से जीत गए। पिछले चुनाव में भी उनका मुकाबला सपा के अविनाश से ही था। बस अंतर काफी कम हो गया है। भाजपा ने सोनभद्र की चारों सीटों पर क्लीन स्वीप करते हुए विपक्षी दलों को जोरदार झटका दिया है।
इस बार भाजपा ने अपने दम पर दुद्धी सीट जीतने में भी कामयाबी पाई है। वर्ष 2017 में तीन सीट भाजपा ने जीती थी, जबकि दुद्धी सीट पर सहयोगी दल अपना-दल एस को जीत मिली थी। विधानसभा चुनाव के दौरान भूपेश चौबे अपने अनोखे तरह के प्रचार को लेकर चर्चा में रहे।
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वृद्ध मतदाता की तेल मालिश करते दिखे थे विधायक भूपेश चौबे
- फोटो : सोशल मीडिया।
टिकट मिलने के बाद से भूपेश चौबे ने चप्पल पहनना छोड़ दिया था। नंगे पांव चलकर ही उन्होंने नामांकन पत्र जमा किया। वह पूरे चुनाव प्रचार के दौरान भी नंगे पांव ही रहे। वह सिर्फ फलाहार ही ग्रहण कर रहे थे। इसके पीछे उनकी दलील दी कि इलाके की जनता उनके लिए भगवान है और भगवान का आशीर्वाद लेने वह चप्पल पहनकर नहीं जाएंगे।
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कान पकड़कर उठक-बैठक करते विधायक
- फोटो : सोशल मीडिया।
त्रिदेव सम्मेलन के दौरान राबर्ट्सगंज से विधायक भूपेश चौबे ने जब मंच पर खड़े होकर कार्यकर्ताओं के सामने कान पकड़कर उठक-बैठक किया तो हंगामा मच गया। सोशल मीडिया में वायरल हुए इस वीडियो की देश स्तर पर चर्चा हुई। सपा अध्यक्ष अखिलेश यादव समेत अन्य विपक्षी दलों ने इसे लेकर भाजपा विधायकों पर खूब निशाना साधा। इसी के बाद तेल मालिश का वीडियो आने के बाद पार्टी की खूब किरकिरी हुई।
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वृद्ध मतदाता की तेल मालिश करते दिखे विधायक
- फोटो : सोशल मीडिया।
डैमेज कंट्रोल करते हुए भाजपा के रणनीतिकारों ने इसे विधायक की सरलता से जोड़ दिया। जिला स्तर से लेकर बूथ स्तर तक जगह-जगह इस चर्चा को हवा दी गई कि विधायक काफी सरल हैं। विधायक होकर भी भला कोई मंच से इस तरह माफी मांगता है क्या? जोर-शोर से प्रचारित इन बातों का जनता पर असर हुआ। लिहाजा जो वर्ग पहले विधायक से नाराज थे उनका भी मिजाज बदलने लगा। रही-सही कसर पीएम मोदी की सभा ने पूरी की।
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भूपेश चौबे
- फोटो : अमर उजाला
इसके अलावा बसपा से ब्राह्मण मतों में बिखराव को रोकने के लिए पार्टी के बड़े ब्राह्मण नेताओं को इसी क्षेत्र में लगाया गया। चतरा और नगवां में जो ब्राह्मण मतदाता विधायक से नाराज थे, उनमें अंतिम समय में यह संदेश दिया गया कि अगर वह भाजपा के साथ नहीं आए तो सपा जीत जाएगी। कोन में स्थानीय होने के मुद्दे को उठाया गया। नतीजा बसपा कमजोर होती गई और इसका लाभ भाजपा को मिला।