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सुर्खियों में चंदाैसी: बावड़ी देखने के लिए उमड़ रही भीड़, आसपास के जिलों के लोग भी पहुंचने लगे.. पीएसी तैनात

Thu, 26 Dec 2024 05:54 PM IST
विमल शर्मा अमर उजाला नेटवर्क, संभल
अमर उजाला नेटवर्क, संभल Published by: विमल शर्मा Updated Thu, 26 Dec 2024 05:54 PM IST
सार

चंदौसी में 150 साल पुराने बांके बिहारी मंदिर और बावड़ी के मिलने से लोग बड़ी संख्या में देखने पहुंच रहे हैं। एएसआई मेरठ की टीम ने बावड़ी का सर्वे किया और मिट्टी हटवाकर संरचना की जांच की। सुरक्षा के लिए पीएसी तैनात है। 

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Chandausi: Crowds are gathering to see stepwell, people from nearby districts have also started arriving
चंदाैसी में बावड़ी को देखने पहुंची महिलाएं - फोटो : संवाद

जिले में150 साल पुराना खंडहरनुमा बांके बिहारी मंदिर और बावड़ी मिलने से चंदौसी सुर्खियों में है। शहर के कोने-कोने से लोग बावड़ी और बांकेबिहारी मंदिर देखने के लिए पहुंच रहे हैं। भीड़ से कार्य में बाधा उत्पन्न नहीं हो इसके लिए पीएसी तैनात है।

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लाल फर्श की जांच करती एएसआई की टीम - फोटो : अमर उजाला

वहां आने वाले लोगों पर नजर रख रही है। बावड़ी मिलने की खबर फैलने के बाद आसपास की महिलाएं और पुरुष समेत बच्चे के साथ कई जिलों के लोगों भी माैके पर पहुंच रहे हैं। कई लोग बावड़ी में उतरकर अंदर भी घूम रहे हैं। 

Chandausi: Crowds are gathering to see stepwell, people from nearby districts have also started arriving
सर्वे करती एएसआई की टीम - फोटो : अमर उजाला

तोता मैना की कब्र देखने के लिए दूर-दूर से आते हैं लोग 

संभल से करीब तीन किलोमीटर दूर संभल-गवां मार्ग पर एक कब्र है। लोक मान्यता में ये कब्र तोता-मैना की कब्र है और प्रेमी की निशानी के तौर पर पहचानी जाती है। इस कब्र को देखने के लिए दूर दराज से लोग आते हैं। इस कब्र पर आयतल कुर्सी और दूसरी तरफ नाद ए अली आयत लिखी है। इस कब्र पर 939 हिजरी लिखा हुआ है।

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Chandausi: Crowds are gathering to see stepwell, people from nearby districts have also started arriving
सर्वे के दौरान जांच करती एएसआई के टीम - फोटो : अमर उजाला

माना जाता है कि इस हिजरी में ही इसको बनाया गया लेकिन क्यों बनाया गया इसका उत्तर नहीं मिलता है। जानकार अपने अपने तरीके से इस कब्र को लेकर व्याख्या करते हैं। 2017-18 में एएसआई ने 1.40 करोड़ रुपये मरम्मत पर खर्च किए थे। 

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बावड़ी में दिखी सीढ़ियां - फोटो : अमर उजाला

पुराने किले से मशहूर इस किले पर वर्ष 2017-18 में भारतीय पुरातत्व सर्वेक्षण की ओर से 1.40 करोड़ रुपये खर्च किए गए थे। बाउंड्री का निर्माण कराया था लेकिन इस बाउंड्री से कोई लाभ नहीं दिखता है। लोगों की आवाजाही बदस्तूर  जारी है।

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