संत शिरोमणि गुरू रविदास की जयंती पर 25 फरवरी को सहारनपुर के शब्बीरपुर गांव में शोभायात्रा के मार्ग को लेकर फिर विवाद की स्थिति बन रही है। प्रशासन ने एक वैकल्पिक मार्ग सुझाया है और उसका प्रयास है कि अनुमति में निर्धारित मार्ग से ही शोभायात्रा निकाली जाए, जबकि अनुसूचित जाति वर्ग के लोग परंपरागत मार्ग से शोभायात्रा निकालने की जिद पर अड़े हुए हैं। अब उन्होंने चेतावनी दी है कि यदि प्रशासन ने 21 फरवरी तक परंपरागत मार्ग से शोभायात्रा निकालने की अनुमति नहीं दी तो 22 फरवरी को वह लोग धर्म परिवर्तन करने को मजबूर हो जाएंगे।
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गुरुवार को गांव शब्बीरपुर निवासी मनवीर सिंह, सुदेश कुमार, शिवकुमार, अग्नि भास्कर, श्याम सिंह, दिनेश कुमार, दल सिंह, पलटूराम, शिमला, उर्मिला, बबली, नरेशो, लाल्ली, बिरमला आदि ने प्रेस नोट जारी किया। उसमें कहा कि 25 फरवरी को संत रविदास की जयंती पर ग्राम शब्बीरपुर में वर्ष 1978 से शोभायात्रा निकलती आई है। इसलिए परंपरागत मार्ग से ही शोभायात्रा निकालने की अनुमति मिलनी चाहिए।
उन्होंने बताया कि गत 13 जनवरी को पुलिस प्रशासनिक अधिकारियों को पत्र भेजकर अनुमति मांगी थी, लेकिन अब तक अनुमति नहीं मिली है। इन्होंने आरोप लगाया कि दूसरे पक्ष के दबाव में आकर प्रशासन अनुमति नहीं दे रहा है और न्यायालय में भी झूठी रिपोर्ट भेजी गई, जिसको सुप्रीम कोर्ट में चुनौती दी गई है। आरोप है कि शोभायात्रा का मार्ग बदलकर उनका उत्पीड़न किया जा रहा है।
चार साल पूर्व हुई थी गांव में हिंसा
शब्बीरपुर में पांच मई 2017 को महाराणा प्रताप की जयंती पर शोभायात्रा के दौरान जातीय हिंसा हुई थी, जिसमें दोनों पक्षों के दो लोगों की जान चली गई थी। वहीं, अगले साल 2018 में पुलिस प्रशासन ने रविदास जयंती को लेकर नया रूट बनाया था जो राजपूत पक्ष के मोहल्लों से अलग रखा गया था।
कोर्ट में डाले प्रार्थनापत्र पर जारी हो चुके नोटिस
शब्बीरपुर में शोभायात्रा के मार्ग को लेकर सुदेश कुमार की तरफ से विशेष न्यायाधीश एससी एसटी के न्यायालय में भी प्रार्थनापत्र दिया। उसमें बताया कि पुलिस और प्रशासनिक अधिकारियों से परंपरागत मार्ग से शोभायात्रा निकालने के लिए अनुमति मांगी, मगर अनुमति नहीं दी और शिकायतपत्रों का निस्तारण नहीं किया गया। सुदेश कुमार का दावा है कि इस पर विशेष न्यायाधीश एससी एसटी कोर्ट वीके लाल ने मामले में प्रमुख सचिव, एसएसपी सहित 14 अधिकारियों को नोटिस जारी किया है।