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महाभारत युद्ध में मारे गए योद्धाओं की आत्मा की शांति के लिए युधिष्ठिर ने इस स्थान पर किया था दीपदान

Sat, 09 Nov 2019 04:49 PM IST
Dimple Sirohi न्यूज डेस्क, अमर उजाला, मेरठ
न्यूज डेस्क, अमर उजाला, मेरठ Published by: Dimple Sirohi Updated Sat, 09 Nov 2019 04:49 PM IST
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Yudhishthira deepdan at ganga bank in hastinapur for peace of souls of Mahabharata war warriors
हस्तिनापुर - फोटो : अमर उजाला

कार्तिक पूर्णिमा गंगा स्नान मेले का इतिहास हस्तिनापुर से जुड़ा माना जाता है। कर्ण मंदिर के महंत शंकर देव जी महाराज के अनुसार महाभारत युद्ध में मारे गए अपने और परायों की मौत के बाद पांडवों को मन व्याकुल हो उठा। जिसके बाद भगवान श्रीकृष्ण ने युधिष्ठिर को दीपदान करने की सलाह दी। इसके बाद श्रीकृष्ण युधिष्ठिर व उनके सभी भाइयों को लेकर गंगा के किनारे पहुंचे और दीपदान कराया। आगे जानें आखिर कैसे शुरू हुई दीपदान की परंपरा: -

Yudhishthira deepdan at ganga bank in hastinapur for peace of souls of Mahabharata war warriors
हस्तिनापुर - फोटो : अमर उजाला

हस्तिनापुर नगरी आज भी कई ऐतिहासिक परंपराओं की गवाह है। इसके बंटवारे को लेकर कौरव और पांडव के बीच कुरुक्षेत्र में महाभारत युद्ध हुआ। जिसमें लाखों योद्धाओं की आत्मा की शांति के लिए गंगा में दीपदान की परंपरा शुरू हुई थी। कार्तिक पूर्णिमा गंगा मेले में दीपदान प्रथा की शुरुआत भगवान कृष्ण ने कराई थी। उसी समय से लोग हस्तिनापुर के साथ मखदूमपुर में भी कार्तिक पूर्णिमा पर गंगा स्नान करने लगे। इससे यहां दीपदान की प्रथा शुरू हुई।

Yudhishthira deepdan at ganga bank in hastinapur for peace of souls of Mahabharata war warriors
हस्तिनापुर - फोटो : अमर उजाला

सगे संबंधी और योद्धाओं के लिए शुरू की थी परंपरा
इतिहास के अनुसार कौरव और पांडवों के बीच हुए महाभारत युद्ध में लाखों योद्धा मारे गए थे। इनमें पांडवों के सगे-संबंधी भी शामिल थे। युद्ध के बाद पांडवों का मन व्याकुल हो उठा। उनमें राजपाट के प्रति विरक्ति का भाव उत्पन्न होने लगा तो भगवान श्रीकृष्ण को चिंता होने लगी।

यह भी पढ़ें: महादानी कर्ण ने इस जगह दान किए थे कवच और कुंडल, मेरठ के इस मंदिर में पूजा करती थी मंदोदरी

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Yudhishthira deepdan at ganga bank in hastinapur for peace of souls of Mahabharata war warriors
हस्तिनापुर - फोटो : अमर उजाला

मुक्ति का उपाय तलाशा
भगवान श्रीकृष्ण और युधिष्ठिर ने अपने संबंधियों की आत्मा की मुक्ति का उपाय जानने के लिए ऋषि-मुनियों से विमर्श किया। इस पर ऋषि-मुनियों के कहे अनुसार वे कार्तिक माह में भैया दूज पर्व संपन्न होने पर हस्तिनापुर से कुछ दूर गंगा किनारे आए थे। सगे संबंधी और योद्धाओं की आत्मा की शांति के लिए ऋषि-मुनियों द्वारा बताए गए अनुष्ठान किए गए। इसके लिए कौरव और पांडवों के साथ भगवान श्रीकृष्ण कई दिनों तक गंगा किनारे रुके।

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Yudhishthira deepdan at ganga bank in hastinapur for peace of souls of Mahabharata war warriors
हस्तिनापुर - फोटो : अमर उजाला

संबंधियों की आत्मा की शांति के लिए चतुर्दशी की संध्या में दीपदान करने पर पांडवों के व्याकुल मन को शांति मिली थी। श्रीकृष्ण गंगा में डुबकी लगाकर पांडवों के साथ हस्तिनापुर लौट गए थे। वर्तमान में गंगा किनारे हस्तिनापुर, मखदूमपुर, विदुर कुटी, गढ़, खरखाली, बिजनौर बैराज समेत विभिन्न स्थानों पर कार्तिक पूर्णिमा गंगा स्नान मेला लगाया जाता है।

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