नन्ही ईहा के बाद क्रांतिधरा के दो बालवीरों ने अपने हुनर से शहर का मान बढ़ाया है। ईहा दीक्षित से प्रेरणा लेकर इन छात्रों ने पढ़ाई के साथ- साथ जीवन में कुछ अलग करने का साहस दिखाया है।बुधवार को जब नई दिल्ली के राष्ट्रपति भवन में विनायक बहादुर और आरुषि शर्मा को प्रधानमंत्री राष्ट्रीय बाल शक्ति पुरस्कार से नवाजा गया तो इनके परिजन खुशियों से झूम उठे। इस दौरान आरुषि के दादा की आंखों से खुशी के आंसू निकल आए। उन्होंने कहा पोती ने कमाल किया है। अगली स्लाइडों में तस्वीरों के साथ पढ़िए पूरी खबर-
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राष्ट्रपति रामनाथ कोविंद के साथ बेटी आरुषि
- फोटो : अमर उजाला
राष्ट्रपति भवन में बुधवार को मेरठ का डंका रहा। आरुषि और विनायक को प्रधानमंत्री राष्ट्रीय बाल शक्ति पुरस्कार से नवाजा गया। वहीं पिछले वर्ष की विजेता ईहा दीक्षित भी कार्यक्रम का हिस्सा बनीं। दो साल से लगातार मेरठ इस पुरस्कार समारोह में सम्मानित हो रहा है। राष्ट्रपति भवन से लेकर अशोका होटल तक क्रांतिधरा का नाम हर जुबान पर रहा...
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आरुषि को आशीर्वाद देते उनके दादा
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आरुषि के दादा बोले, पोती ने किया कमाल
आरुषि के दादा मंगतराम ने जैसे ही पोती को टीवी पर राष्ट्रपति के हाथों सम्मानित होते देखा तो उनकी खुशी का ठिकाना न रहा। ब्रह्मपुरी में बेटी शांति के यहां पोती की सफलता के इन गौरवमयी क्षणों को देखकर उनकी आंखें नम हो गईं। दादा ने कहा जिस पोती के लिए हम चिंतित थे, उसका क्या होगा, आज वही हमारे परिवार की पहचान बन गई है। पोती के बचपन और दुश्वारियों को याद करते हुए दादा मंगतराम बोले, मेरी पोती ने अपने प्रयासों से मेहनत का वो पत्थर उछाला है जिसने आज वाकई आसमां में सुराख कर दिया। इससे ज्यादा मैं कुछ कह नहीं सकता।
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अपने माता-पिता के साथ विनायक
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बता दें कि विनायक और आरुषि को राष्ट्रपति भवन में सम्मानित होने की खुशी से दोनों ही बच्चों के परिवारों में खुशी का माहौल रहा। दोनों बच्चे मम्मी-पापा के साथ आयोजन में शामिल होने गए हैं। लेकिन घर पर परिवार के अन्य सदस्यों, रिश्तेदारों व मित्रों में बेहद उत्साह रहा। आरुषि के चाचा अजय शर्मा, कजिन भाई विशाल ने भी बेहद खुशी जताई। बुआ ने कहा कि बेटी ही परिवार का नाम रोशन करती है। एक बेटी दस बेटों के बराबर होती है।
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प्रभात शर्मा, आरुषि के कोच
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अनुशासन से मिली सफलता
समय की पाबंदी और पूरा अनुशासन ही आरुषि की सफलता का राज है। बहुत मेहनती और खेल के प्रति ईमानदार खिलाड़ी है। - प्रभात शर्मा, आरुषि के कोच