बागपत में निवाड़ा के यमुना खादर में पॉकलेन और जेसीबी मशीनें उतारे जाने का ग्रामीणों ने जमकर विरोध किया। ग्रामीणों ने कहा यदि गांव में जबरन खनन किया तो आंदोलन शुरू करेंगे।
PHOTOS: बहती यमुना के बीच से खनन परिवहन, ग्रामीणों ने दी चेतावनी
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किसके इशारे पर बनाया जा रहा रास्ता
निवाड़ा में हंगामे के बाद खनन ठेकेदारों ने बहती हुई यमुना नदी के बीच से रेत लदे वाहन गुजारने शुरू कर दिए हैं। जबकि कच्चे रास्ते की शिकायत के बाद प्रदूषण विभाग की टीम दो बार जांच कर चुकी है और एनजीटी में 10 जुलाई को सुनवाई हैं। एनजीटी के फैसले से पहले ही बहती यमुना नदी से रास्ता बना दिया और फिर से मशीनरी यमुना खादर में उतार दी है। ग्रामीणों ने कहा यदि प्रशासन ने सुनवाई नहीं की तो कमिश्नर दफ्तर पर आंदोलन करेंगे।
शुक्रवार की रात में निवाड़ा गांव के किसानों को भनक लगी कि उनके खेतों में खनन शुरू कर दिया है। सैकड़ों ग्रामीण यमुना खादर पहुंचे और मशीनों पर चढ़कर खनन रुकवा दिया। यहां देर रात तक हंगामा रहा। दोनों पक्षों के बीच तनाव की स्थिति बन गई। इसके बाद यहां खनन कर रहे लोग मशीनरी लेकर चले गए।
ग्रामीणों ने कहा निवाड़ा से खनन परिवहन के लिए रास्ता बनाने की तैयारी थी, इससे ग्रामीणों ने नाकाम कर दिया। उधर, खनन ठेकेदार पक्ष के लोगों ने खनन परिवहन के लिए बहती हुई यमुना नदी के बीच से फिर से खनन परिवहन शुरू कर दिया। पहले जिस जगह कच्चा रास्ता था, उनकी जगह से फिर से खनन के लिए परिवहन शुरू कर दिया। बहती यमुना के बीच जेसीबी उतारकर कच्चा रास्ता दुरुस्त कराया और यहीं से परिवहन चल रहा है। वहीं बदरखा में रेत से भरे ओवरलोड ट्रकों के विरोध में ग्रामीणों ने रास्ते में गड्ढा खोद दिया। जिससे ओवर लोड वाहनों का आवागमन बंद करा दिया।
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एनजीटी में कच्चे रास्ते की शिकायत के बाद केंद्रीय प्रदूषण विभाग की टीम ने दो बार गौरीपुर में छापेमारी की। कच्चा रास्ता हटवा दिया गया था। प्रशासन का कहना था कि जहां पर रास्ता है, यहां पर गौरीपुर का रकबा है और यह नदी क्षेत्र नहीं है, लेकिन इन दिनों नदी की धारा यहीं से बह रही है। प्रदूषण विभाग की टीम को एनजीटी में रिपोर्ट देनी है और इस पर 10 जुलाई को सुनवाई होगी।