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चौंकाने वाला खुलासा, एनसीईआरटी की फर्जी किताबें छापने के मामले में सामने आई अब ये बड़ी बात

Tue, 25 Aug 2020 05:54 PM IST
कपिल kapil गजेंद्र चौधरी, अमर उजाला, मेरठ
गजेंद्र चौधरी, अमर उजाला, मेरठ Published by: कपिल kapil Updated Tue, 25 Aug 2020 05:54 PM IST
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Meerut NCERT Fake Books News: big disclosure in the case of printing fake books of NCERT in Meerut
मोहकमपुर में बनाया गया तिरुपति होटल - फोटो : अमर उजाला

मेरठ में एनसीईआरटी की नकली किताबें छापने के मामले में एक और चौंकाने वाला खुलासा हुआ है। सीजीएसटी विभाग की जांच पड़ताल में सामने आया कि करीब तीन साल से तिरुपति होटल में टीएनएचके पब्लिकेशन का किताब छापने का कारोबार दर्शाया हुआ था। सवाल सरकारी मशीनरी पर भी उठता है कि इसकी जांच क्यों नहीं की गई।

Meerut NCERT Fake Books News: big disclosure in the case of printing fake books of NCERT in Meerut
भाजपा नेता का गोदाम - फोटो : अमर उजाला

एनसीईआरटी की नकली किताबों के प्रकरण में कई सरकारी विभाग भी लिप्त हैं। करोड़ों रुपये के वारे न्यारे करने वाले रसूखदार या सत्ताधारी नेता नौकरशाहों से मिलकर यह काम करते हैं। एनसीईआरटी की नकली किताबों के मामले में पुलिस के अलावा अन्य विभागों की भूमिका भी संदिग्ध है। सोमवार को जानकारी मिली कि लिखापढ़ी में मोहकमपुर में जिस जगह पर आरोपी भाजपा नेता संजीव गुप्ता और उसके भतीजे सचिन गुप्ता ने टीएनएचके पब्लिकेशन दिखाया हुआ था, वहां पर तिरुपति होटल चलता मिला। जिसे देखकर सीजीएसटी के अधिकारी भी हैरान रह गए।

Meerut NCERT Fake Books News: big disclosure in the case of printing fake books of NCERT in Meerut
एनसीईआरटी मेरठ नकली पुस्तकें - फोटो : अमर उजाला

नोटिस देकर होगा क्लेम 
छानबीन में पता चला कि तीन साल पहले तिरुपति होटल की जगह आंचल पब्लिकेशन के नाम से प्रिंटिंग मशीनें चलती थी। इस मामले में पुलिस और अन्य विभागों की भी पोल खुल गई है। सवाल उठता है कि आखिर तीन साल से तिरुपति होटल में पब्लिकेशन को लिखा पढ़ी में कैसे चला रखा था और सरकारी विभाग के अधिकारियों को इसके बारे में जानकारी क्यों नहीं हुई। राज्य वस्तु एवं सेवा कर (स्टेट जीएसटी) के ज्वाइंट कमिश्नर ओपी वर्मा का कहना है कि इस मामले में उक्त पब्लिकेशन को नोटिस देकर उन पर क्लेम भी होगा। आखिर उन्होंने पब्लिकेशन की जगह लिखा पढ़ी में क्यों नहीं बदलवाई।

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फर्जी किताबों का गोदाम - फोटो : अमर उजाला

सचिन की मां अनीता गुप्ता के नाम फर्म 
सीजीएसटी के डिप्टी ज्वाइंट कमिश्नर वीरेंद्र नारायण वर्मा का कहना है कि टीएनएचके पब्लिकेशन की फर्म पुलिस द्वारा बनाए गए मुख्य आरोपी सचिन गुप्ता की मां अनीता गुप्ता के नाम पर लिखा पढ़ी में दर्ज है। इस फर्म का रजिस्ट्रेशन 22 जनवरी 2002 को हुआ था। जबकि पुलिस ने करोड़ों रुपये की नकली किताबों के मामले में अभी तक अनीता गुप्ता का नाम मुकदमे में कहीं शामिल नहीं किया है। संजीव गुप्ता और सचिन गुप्ता को परतापुर पुलिस ने मुख्य आरोपी बनाया है। जबकि कागजों की लिखा पढ़ी में इस फर्म में इनका कहीं पर भी नाम नहीं दर्शाया गया।

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जांच करती पुलिस - फोटो : अमर उजाला

होटल के लाइसेंस पर भी सवाल 
तिरुपति होटल में टीएनएचके पब्लिकेशन चल रहा है, ऐसे में सवाल उठता है कि होटल का लाइसेंस कैसे पास हो गया। इस मामले में होटल मैनेजर से बातचीत की गई तो उन्होंने बताया कि वह एक साल से होटल की देखरेख कर रहे हैं। होटल का मालिक सुशील गुप्ता (सचिन गुप्ता के पिता) को बताया गया। इस मामले की जानकारी परतापुर थाने की पुलिस को दी गई तो उन्होंने भी तिरुपति होटल की जांच करने की बात कही। हालांकि अभी इस मामले में कोई भी लिखा पढ़ी नहीं हुई है। 

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