फ्री ई-पेपर
पर्सनलाइज़्ड फ़ीड
पर्सनलाइज़्ड नोटिफ़िकेशन
चलते-फिरते ख़बरें
लॉयल्टी रिवॉर्ड्स
डाउनलोड करें

सब्सक्राइब करें

टोक्यो ओलंपिक : मेरठ की अन्नू रानी से देश को पदक की आस, गन्ने को भाला बनाकर करती थीं अभ्यास 

Mon, 02 Aug 2021 05:52 PM IST
Dimple Sirohi न्यूज डेस्क, अमर उजाला, मेरठ
न्यूज डेस्क, अमर उजाला, मेरठ Published by: Dimple Sirohi Updated Mon, 02 Aug 2021 05:52 PM IST
विज्ञापन
Tokyo olympics : Meerut javelin thrower Annu Rani will hit the ground with the intention of qualifying
अन्नू रानी-भाला फेंक - फोटो : social Media

टोक्यो ओलंपिक में मेरठ की बेटी अन्नू रानी से मेरठ ही नहीं, पूरे देश को पदक की उम्मीद बंधी है। कल यानी मंगलवार को बहादुरपुर गांव की एथलीट अन्नू रानी ओलंपिक में भाला फेंक प्रतिस्पर्धा में क्वाईलाफाई करने के इरादे से मैदान पर उतरेंगी।



बता दें कि अपने ही नेशनल रिकॉर्ड को सात बार तोड़ चुकी अन्नू रानी ने वर्ल्ड रैंकिंग में जगह बनाकर ओलंपिक के लिए कोटा लेने वाली पहली भारतीय एथलीट हैं। भाला फेंक खिलाड़ी अन्नू रानी तीन अगस्त को सुबह 5:50 बजे क्वालीफाई करने के इरादे से मैदान पर उतरेंगी।  आगे पढ़ें, उनके संघर्ष और सफलता की पूरी कहानी: -
  

Tokyo olympics : Meerut javelin thrower Annu Rani will hit the ground with the intention of qualifying
अन्नू रानी-भाला फेंक - फोटो : social Media

गन्ने को भाला बनाकर किया भाला फेंक का अभ्यास
जैवलिन क्वीन के नाम से पहचानी जाने वाली अन्नू के संघर्ष की कहानी किसी फिल्म से कम नहीं है। गांवों की पगडंडियों पर खेलते और गन्ने को भाला बनाकर प्रैक्टिस करने वाली अन्नू एक दिन ओलंपिक में आयोजित प्रतिस्पर्धाओं में देश का प्रतिनिधित्व करेंगी, यह शायद ही किसी ने सोचा होगा, लेकिन अपने संघर्ष और कड़ी मेहनत के दम पर उन्होंने ये कर दिखाया। अब मंगलवार को वह जीत के इरादे से मैदान पर उतरेंगीं। 

Tokyo olympics : Meerut javelin thrower Annu Rani will hit the ground with the intention of qualifying
चकरोड़ जहां अभ्यास करती थीं अन्नू - फोटो : Amar Ujala Meerut

पिता ने रोका तो चोरी से किया अभ्यास
अन्नू रानी तीन बहन व दो भाइयों में सबसे छोटी हैं। उनके सबसे बड़े भाई उपेंद्र कुमार भी 5,000 मीटर के धावक थे और विश्वविद्यालय स्तर की प्रतियोगिताओं में हिस्सा भी ले चुके हैं। बड़े भाई के साथ अन्नू रानी ने भी खेल में रुचि दिखाई और सुबह चार बजे उठकर गांव में ही रास्तों पर दौड़ने जाया करतीं।

कई बार पिता ने अन्नू खेल में दिलचस्पी नहीं दिखाई तो अन्नू चोरी से अभ्यास करतीं। अन्नू यहां किसी ग्राउंड में नहीं, बल्कि कच्चे संकरे रास्ते जिसे ग्रामीण भाषा में चकरोड़ कहा जाता है, उस पर दौड़तीं। इसी चकरोड़ पर गन्ने को भाला बनाकर वह पहले जोर से फेंकती। उन्होंने यह प्रयास कई महीनों तक जारी रखे। 

विज्ञापन
विज्ञापन
Tokyo olympics : Meerut javelin thrower Annu Rani will hit the ground with the intention of qualifying
अन्नू रानी, भाई के बच्चों के साथ - फोटो : Amar Ujala Meerut

भाई ने किया त्यागा, तो अन्नू ने बढ़ाया मान
अन्नू की खेल में रुचि बढ़ी, तो भाई उपेंद्र कुमार ने उन्हें गुरुकुल प्रभात आश्रम का रास्ता दिखाया। घर से करीब 20 किलोमीटर दूर होने के कारण अन्नू जैवलिन थ्रो का अभ्यास करने के लिए सप्ताह में तीन दिन गुरुकुल प्रभात आश्रम के मैदान में जाती थीं। अन्नू के परिवार की आर्थिक स्थिति ऐसी नहीं थी कि दो खिलाड़ियों पर होने वाले खर्चे को वहन कर सकें, इसे देखकर भाई उपेंद्र ने त्याग किया और बहन को आगे बढ़ाने में जुट गए।

विज्ञापन
Tokyo olympics : Meerut javelin thrower Annu Rani will hit the ground with the intention of qualifying
अन्नू रानी-भाला फेंक - फोटो : social Media

चंदे की रकम से खरीदे थे जूते
उपेंद्र बताते हैं कि अन्नू के पास जूते नहीं थे, चंदे से इकट्ठा की गई रकम से उसके लिए जूते खरीदे। अन्नू ने अपना अभ्यास जारी रखा और जेवलिन थ्रो में बेहतरीन प्रदर्शन किया। अपने ही रिकॉर्ड तोड़कर वह नेशनल चैंपियन बन गईं। इसके बाद अन्नू ने पीछे मुड़कर नहीं देखा। आज वह ओलंपिक में हिस्सा ले रही हैं। देश के साथ-साथ मेरठवासियों भी उनकी जीत की कामना कर रहे हैं। 

अगली फोटो गैलरी देखें
विज्ञापन

रहें हर खबर से अपडेट, डाउनलोड करें Android Hindi News App, iOS Hindi News App और Amarujala Hindi News APP अपने मोबाइल पे|
Get all India News in Hindi related to live update of politics, sports, entertainment, technology and education etc. Stay updated with us for all breaking news from India News and more news in Hindi.

विज्ञापन
विज्ञापन

एड फ्री अनुभव के लिए अमर उजाला प्रीमियम सब्सक्राइब करें

Next Article

AU ऐप में पढ़ें

Followed