साल 2017 में रविंद्र गुर्जर हत्याकांड में उम्रकैद की सजा होने से पहले ही बदन सिंह बद्दो ने अपनी करोड़ों की संपत्ति ठिकाने लगा दी थी। उसने पंजाबीपुरा स्थित अपनी आलीशान कोठी भाभी को और अन्य संपत्ति अपने गुर्गों को उपहार में दे दी। यह पोल तब खुली जब पुलिस को एक बैंक का नोटिस मिला। उसी के आधार पर पुलिस ने बद्दो की कोठी पर कुर्की की कार्रवाई की।
बद्दो ने अपनी आलीशान कोठी को पुलिस-प्रशासन से बचाने के लिए आंख मिचौली का खेल खेला। इसमें पुलिस 19 महीने तक उलझी रही। बद्दो ने लिखापढ़ी में अपनी कोठी बेरीपुरा निवासी भाभी कुलदीप कौर पत्नी सुखवंत सिंह के नाम दिखाई थी। उन्हें बतौर उपहार कोठी रजिस्ट्री की है। इसके बाद भी वह भवन टैक्स, जल टैक्स व अन्य टैक्स अपने नाम से जमा करता था। उसे आशंका थी कि रविंद्र हत्याकांड में उसे सजा हो सकती है। ऐसे में सजा से पहले ही उसने अपनी संपत्ति परिचित और गुर्गों को दे दी।
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बद्दो के खिलाफ कार्रवाई
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एएसपी कृष्ण कुमार विश्नोई ने बद्दो के खिलाफ पहले सारे सबूत जुटाए, उसके बाद कोठी पर कुर्की की कार्रवाई की। पुलिस का दावा है कि कोर्ट के आदेश पर कुर्की की कार्रवाई हुई है।
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कुख्यात बदन सिंह बद्दो
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कोर्ट में उठेंगे सवाल
बार एसोसिएशन के अध्यक्ष अधिवक्ता वीके शर्मा का कहना है कि रजिस्ट्री तीन तरह से विरासत, विक्रय व दान पात्र में होती है। तीनों तरह से रजिस्ट्री जिसके भी नाम है, उसका मालिकाना हक है। सीनियर अधिवक्ता अमित दीक्षित ने बताया कि पुलिस द्वारा कुर्की की कार्रवाई को लेकर कोर्ट में सवाल उठेंगे।
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बदन सिंह बद्दो
- फोटो : अमर उजाला
बैंक के एक नोटिस पर जांच
2003 में बद्दो ने जवाहर सिंह से प्लाट लेकर अपने नाम रजिस्ट्री कराई थी। उसने बैंक ऑफ बड़ौदा से लोन भी लिया था। बद्दो के नाम कोई संपत्ति नहीं है, यह कहकर 19 माह से पुलिस, नगर निगम और एमडीए पल्ला झाड़ रहे थे। एडीजी के निर्देश पर एएसपी ने बद्दो की कुंडली खंगाली तो बैंक का एक नोटिस पुलिस को मिला। इस आधार पर पुलिस ने बद्दो की इस कोठी का रिकॉर्ड देखा।