मेरठ जिले में स्वाइन फ्लू का हमला जारी है। मंगलवार को दो और लोगों को स्वाइन फ्लू की पुष्टि हुई है। स्वास्थ्य विभाग की तरफ से इन्हें और इनके परिजनों समेत आठ लोगों को टेमी फ्लू की दवाई है। इस सीजन में स्वाइन फ्लू के 26 मरीज मिल चुके हैं। दो महिलाओं की मृत्यु हो चुकी है। नए मरीजों में 38 वर्षीय युवक मूल रूप से अलवर राजस्थान की रहने वाला है। वह मेरठ में निजी कंपनी में नौकरी करते हैं। वह करीब एक सप्ताह पहले राजस्थान गए थे। दो दिन पहले ही वहां से लौटे हैं। तब से ही उन्हें तेज जुकाम और बुखार की शिकायत है। वह एक निजी चिकित्सालय में अपना इलाज करा रहे हैं। इनकी पत्नी और इनके भाई को टेमी फ्लू की दवा दी गई है। स्वाइन फ्लू पीड़ित महिला 30 साल की हैं। उन्हें भी बुखार और कफ की शिकायत है। उन्हें ऑक्सीजन सपोर्ट भी रखा जा चुका है। उन्हें अस्थमा की भी शिकायत है। वह अपने घर पर हैं और उनकी तबियत स्थिर है। आगे जानें कैसे होता है यह रोग और इससे कैसे किया जा सकता है बचाव:-
यूपी: मेरठ में स्वाइन फ्लू का हमला जारी, इस रोग से बचने के लिए करें ये उपाय
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एच1एन1 वायरस नया नहीं है, चिकित्सका विशेषज्ञों के अनुसार एच1एन1 वायरस का चाल, चलन व चरित्र समय के हिसाब से बदलता रहता है। इसकी वैक्सीन है, लेकिन 60 प्रतिशत मरीजों पर यह कारगर नहीं है। संस्थान में टैमी फ्लू की व अन्य उपचार की सुविधाएं उपलब्ध हैं। इसलिए अब इससे अधिक घबराने की जरूरत नहीं है, यह कॉमन फ्लू हो गया है।
एक्सपर्ट बताते हैं कि इससे होने वाली मृत्यु दर एक प्रतिशत से भी कम है। अधिकांश उन मरीजों की उपचार के दौरान मौत होती है, जिनको स्वाइन फ्लू के साथ अन्य खतरनाक बीमारी भी होती है। बीमारी को फैलने से बचाने के लिए हाथ मिलाने की बजाए नमस्ते करके काम चलाएं। इसके अलावा खांसते समय मुंह पर कपड़ा रखें और अपना हाथ साफ रखें। टिश्यू पेपर का इस्तेमाल करें। इसमें सबसे अहम भीड़ व सेंट्रल एसी से बचें।
हाथ मिलाने की बजाए करें नमस्ते
चिकित्सक बताते हैं कि हवाई यात्रा इसके फैलने का प्रमुख कारण है। चिकित्सक बताते हैं कि इस वायरस से सीधे बचा नहीं जा सकता, क्योंकि यह हमारे वातावरण में है। इसके लिए जरूरी है कि हम एहतियात रखें और अपनी रोग प्रतिरोधक क्षमता को मजबूत बनाएं। इसके लिए वैक्सीन है, जिसकी कीमत 700 रुपये व इससे ऊपर है। लेकिन यह शत-प्रतिशत कारगर होगी कहा नहीं जा सकता।
इनके लिए है अधिक खतरा
डायबिटीज, फेफडे़ में संक्रमण, हार्ट, लीवर, किडनी रोगी, ब्लड डिस्ऑर्डर जैसी बीमारी वाले मरीज की रोग प्रतिरोधक क्षमता कम होती है। इसके अलावा बुजुर्ग, गर्भवती, पांच साल से कम आयु के बच्चे स्वाइन फ्लू की चपेट में जल्दी आते हैं। पहले यह बीमारी सिर्फ सूअरों में पाई जाती थी, लेकिन इसने इंसानों को भी अपनी चपेट में लेना शुरू कर दिया है। वर्ल्ड हेल्थ आर्गेनाइजेशन की रिपोर्ट के अनुसार, स्वाइन फ्लू एक तरह का संक्रामक रोग है, जो सांस के जरिए फैलता है।