सुप्रीम कोर्ट द्वारा अडल्टरी यानी विवाहेतर संबंध को अपराध के दायरे से बाहर कर देने पर मिली जुली प्रक्रिया दी। कुछ लोगों का कहना है कि आईपीसी की धारा 497 में अडल्टरी को अपराध बताने वाले प्रावधान को असंवैधानिक करार देना भारतीय संस्कृति के विरुद्ध है, लेकिन कुछ कोर्ट के फैसले का स्वागत कर रहे हैं।
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चंद्रजीत सिंह निक्कू वरिष्ठ अधिवक्ता व पार्षद
न्यायालय सर्वोपरि है। हर किसी को मौलिक को अधिकार प्राप्त हैं, लेकिन सुप्रीम कोर्ट के इस फैसले से परिवारों में विघटन पैदा होगा। यूरोपीय संस्कृति को बढ़ावा मिलेगा और भारतीय संस्कृति खत्म हो जाएगी। भारतीय संस्कृति के हिसाब से यह फैसला ठीक नहीं है। --चंद्रजीत सिंह निक्कू वरिष्ठ अधिवक्ता व पार्षद
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फाइल फोटो
- फोटो : अमर उजाला
सुप्रीम कोर्ट के फैसले से पश्चिमी सभ्यता को बढ़ावा मिलेगा। इस फैसले से घर टूट जाएंगे और बच्चों पर बुरा असर पड़ेगा। उनकी नजर में कोर्ट फैसला बिल्कुल गलत है। भारतीय संस्कृति में ऐसा नहीं होना चाहिए। --- डा. कुदसिया अंजुम, प्रधानाचार्य हिंदू कन्या इंटर कॉलेज
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कोर्ट के फैसले पर टिप्प्णी करना उचित नहीं है, लेकिन हमारे देश और किसी भी धर्म के लिहाज से यह फैसला बिल्कुल गलत है। धर्म भी इसकी इजाजत नहीं देता है। कोर्ट के फैसले से भारतीय संस्कृति और पति-पत्नी के पवित्र रिश्ते खराब हो जाएंगे। -- मौलवी फरीद, प्रबंधक जामा मस्जिद
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सुप्रीम कोर्ट के फैसले का वह स्वागत करती है। इस फैसले से पीड़ित महिलाओं को जीवन जीने का अधिकार मिलेगा। कई बार देखा जाता है कि पति द्वारा पत्नी का उत्पीड़न किया जाता है और वह उसे तलाक भी नहीं देता है, लेकिन सुप्रीम कोर्ट के फैसले के बाद महिला अपनी पसंद से अपना जीवन साथी चुन सकेगी। -- डा. रेखा कुमार
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