मेरठ समेत पश्चिमी यूपी के 10 जिलों में आज और कल सीबीएसई स्कूलों की बसों की हड़ताल है। इससे लाखों छात्र-छात्राएं प्रभावित हुए हैं। बड़ी संख्या में बच्चों द्वारा स्कूल न पहुंच पाने की बात कही जा रही है। वहीं मंगलवार को ही स्कूल प्रबंधकों ने अभिभावकों को मैसेज कर दिया कि वह खुद अपने बच्चों को स्कूल में छोड़ने व लेकर जाने का प्रबंध करें।
स्कूल बस नहीं आई तो बच्चों को खुद छोड़ने व लेने पहुंचे अभिभावक, जाम ही जाम, दिखा ऐसा नजारा
उप्र मोटर व्हीकल अधिनियम में हुए परिवर्तन को लेकर स्कूल संचालकों में रोष है। बसों की समस्या को लेकर सांसद डॉ. अनिल अग्रवाल की अगुवाई में एआईईईएफ के राष्ट्रीय अध्यक्ष लियाकत अली ने लखनऊ में परिवहन मंत्री अशोक कटारिया को ज्ञापन भी सौंपा। हड़ताल मेरठ, गौतमबुद्धनगर, गाजियाबाद, हापुड़, मुजफ्फरनगर, सहारनपुर, शामली, समेत कई जिलों में रहेगी।
स्कूल प्रबंधकों का कहना है कि सरकार ने अधिनियम में जो बदलाव किए हैं, उनको लागू करना प्रबंधन के लिए नामुमकिन है। नियमों को लागू करने पर स्कूल बसों का किराया डेढ़ से दोगुना बढ़ जाएगा। इसका भार अभिभावकों पर पड़ेगा। परिवहन अधिनियम में परिवर्तन नीतिगत नहीं हैं। सरकार स्कूल संचालकों का उत्पीड़न करना चाहती है। सरकार इन बदलावों पर पुनर्विचार करे।
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बढ़ जाएगा स्कूल बसों का किराया
अभी ग्रामीण क्षेत्र में 500 से 800 व शहरी क्षेत्र में 1000 से 1500 बसों का किराया है। लेकिन बदलाव के बाद ग्रामीण क्षेत्र में 1600 और देहात क्षेत्र में दो हजार से 22 सौ तक किराया हो जाएगा।
गेट पर लगाएं शिक्षकों की टीम
मेरठ स्कूल फेडरेशन ने 28 व 29 अगस्त को स्कूल बसें न चलाने का निर्णय लिया है। इस संबंध में डीआईओएस गिरजेश चौधरी ने सभी विद्यालयों के प्रधानाचार्यों को निर्र्देश जारी किए हैं। डीआईओएस ने कहा है कि ऐसी स्थिति में अभिभावक अपने बच्चों को विद्यालय छोड़ने और लेने अपने वाहन से आएंगे। इससे स्कूल के बाहर जाम लगने की आशंका है। लिहाजा बच्चों की सुरक्षा के लिए विद्यालय के अध्यापकों की टीम विद्यालय के गेट पर लगाएं।
अधिनियम को लेकर ये हैं मांगें
नए व्हीकल अधिनियम में स्कूल बस में महिला अटेंडेंट का होना जरूरी है। स्कूल संचालकों का कहना है अगर महिला अटेंडेंट बस में रखी जाती है तो उसकी सुरक्षा की जिम्मेदारी आखिर कौन लेगा।
अधिनियम के अनुसार स्कूल बस में हर सीट पर सीट बेल्ट होनी चाहिए। बस स्टाफ के लिए यूनिफॉर्म में होना और अग्नि सुरक्षा यंत्र होना जरूरी है। बस में कैमरे भी होने चाहिए। अगर कोई भी स्कूल संचालक इन सभी सुविधाओं को बस में देता है तो बस का किराया बढ़ेगा।
सरकार अभी स्कूल बसों पर 28 से 45 फीसदी तक जीएसटी लगाती है। अगर सरकार इस तरह स्कूल संचालकों का उत्पीड़न करेगी तो उनको जीएसटी में छूट मिलनी चाहिए।
स्कूल से जुड़े सभी वाहनों में होने वाली दुर्घटना की जिम्मेदारी सीधे-सीधे स्कूल प्रबंधन व संचालक की होगी। जोकि पूर्णतया गलत है।
स्कूल बसों के संचालन की वर्तमान व्यवस्था के तहत आरटीओ स्कूल बसों की निगरानी करते हैं। लेकिन अधिनियम में परिवर्तन होने के बाद जिला स्तर पर दो समितियों का गठन किया जाएगा। पहली जिला ट्रांसपोर्ट कमेटी और दूसरी स्कूल ट्रांसपोर्ट कमेटी। इस प्रकार तीन स्तरीय जांच व्यवस्था होने व निगरानी कमेटी द्वारा जांच करने के कारण भ्रष्टाचार बढ़ेगा।
उधर मेरठ देहात क्षेत्र के सरूरपुर में भूनी चौराहे पर स्कूलों की ट्रांसपोर्ट हड़ताल के बाद अभिभावकों ने गुस्सा जाहिर किया। कई छात्र छात्राओं के परिजनों ने की सड़क पर जाम लगाने की कोशिश की। सूचना पर पुलिस मौके पर पहुंची और अभिभावकों को समझाने की कोशिश की। पुलिस और परिजनों में काफी देर तक कहासुनी होती रही। हालांकि पुलिस की सर्तकता ने सड़क पर जाम नहीं लगने दिया। वहीं परिजनों ने कल तक समस्या का समाधान नहीं होने पर चक्काजाम करने की धमकी दी है।