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यूपी के इन 10 जिलों में दो दिन तक स्कूली बसों की हड़ताल, सरकार ने अधिनियम में किए ये बदलाव

Wed, 28 Aug 2019 02:15 AM IST
कपिल kapil न्यूज डेस्क, अमर उजाला, मेरठ
न्यूज डेस्क, अमर उजाला, मेरठ Published by: कपिल kapil Updated Wed, 28 Aug 2019 02:15 AM IST
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Strike of school buses in ten district of West UP after Government made changes in the Act
स्कूल बस - फोटो : अमर उजाला

पश्चिमी यूपी के 10 जिलों में आज और कल सीबीएसई स्कूलों की बसों की हड़ताल रहेगी। इससे लाखों छात्र-छात्राएं प्रभावित होंगे। मंगलवार को स्कूलों ने इस संबंध में अभिभावकों को मैसेज भेजे कि वह बच्चों को खुद लेकर आएं।

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वहीं कई आईसीएसई स्कूलों के टेंपो चालकों ने अभिभावकों से बुधवार को खुद बच्चों को स्कूल छोड़ने की बात कही है। उप्र मोटर व्हीकल अधिनियम में हुए परिवर्तन को लेकर स्कूल संचालकों में रोष है। बसों की समस्या को लेकर सांसद डॉ. अनिल अग्रवाल की अगुवाई में एआईईईएफ के राष्ट्रीय अध्यक्ष लियाकत अली ने परिवहन मंत्री अशोक कटारिया को ज्ञापन सौंपा। 
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ये हड़ताल मेरठ, गौतमबुद्धनगर, गाजियाबाद, हापुड़, बुलंदशहर, मुजफ्फरनगर, सहारनपुर, शामली, समेत कई जिलों में रहेगी। स्कूल प्रबंधकों का कहना है कि सरकार ने अधिनियम में जो बदलाव किए हैं, उनको लागू करना प्रबंधन के लिए नामुमकिन है। नियमों को लागू करने पर स्कूल बसों का किराया डेढ़ से दोगुना बढ़ जाएगा। इसका भार अभिभावकों पर पड़ेगा। परिवहन अधिनियम में परिवर्तन नीतिगत नहीं हैं। ऐसा लगता है कि सरकार स्कूल संचालकों का उत्पीड़न करना चाहती है। सरकार इन बदलावों पर पुनर्विचार करे। 
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बढ़ जाएगा स्कूल बसों का किराया
अभी ग्रामीण क्षेत्र में 500 से 800 व शहरी क्षेत्र में 1000 से 1500 बसों का किराया है। लेकिन बदलाव के बाद ग्रामीण क्षेत्र में 1600 और देहात क्षेत्र में दो हजार से 22 सौ तक किराया हो जाएगा।

मोटर व्हीकल एक्ट में किए गए बदलावों का पालन करना बेहद मुश्किल है। इससे स्कूल बसों का किराया बढे़गा। अभिभावकों पर आर्थिक बोझ पड़ेगा। सरकार को नियमों पर पुनर्विचार करने की जरूरत है। इस संबंध में सीआईएस के पदाधिकारी 29 अगस्त को परिवहन मंत्री से मुलाकात कर मांग पत्र देंगे। - राहुल केसरवानी, सहोदय सचिव

28 व 29 अगस्त को स्कूल बसों की हड़ताल रहेगी। स्कूल समय पर ही खुलेंगे। इस संबंध में सभी स्कूलों ने छात्रों व अभिभावकों को सूचित कर दिया है। मोबाइल एसएमएस, डायरी व असेंबली में भी स्कूल बसों की हड़ताल की सूचना दी गई है। - डॉ. कर्मेंद्र सिंह अध्यक्ष सहोदय महान

अधिनियम को लेकर यह हैं मांगे 
- नए व्हीकल अधिनियम में स्कूल बस में महिला अटेंडेंट का होना जरूरी है। स्कूल संचालकों का कहना है अगर महिला अटेंडेंट बस में रखी जाती है तो उसकी सुरक्षा की जिम्मेदारी आखिर कौन लेगा।  

- अधिनियम के अनुसार स्कूल बस में हर सीट पर सीट बेल्ट होनी चाहिए। बस स्टाफ के लिए यूनिफॉर्म में होना और अग्नि सुरक्षा यंत्र होना जरूरी है। बस में कैमरे भी होने चाहिए। अगर कोई भी स्कूल संचालक इन सभी सुविधाओं को बस में देता है तो बस का किराया बढ़ेगा।

- सरकार अभी स्कूल बसों पर 28 से 45 फीसदी तक जीएसटी लगाती है। अगर सरकार इस तरह स्कूल संचालकों का उत्पीड़न करेगी तो उनको जीएसटी में छूट मिलनी चाहिए। 

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- स्कूल से जुड़े सभी वाहनों में होने वाली दुर्घटना की जिम्मेदारी सीधे-सीधे स्कूल प्रबंधन व संचालक की होगी। जोकि पूर्णतया गलत है। 

- स्कूल बसों के संचालन की वर्तमान व्यवस्था के तहत आरटीओ स्कूल बसों की निगरानी करते हैं। लेकिन अधिनियम में परिवर्तन होने के बाद जिला स्तर पर दो समितियों का गठन किया जाएगा। पहली जिला ट्रांसपोर्ट कमेटी और दूसरी स्कूल ट्रांसपोर्ट कमेटी। इस प्रकार तीन स्तरीय जांच व्यवस्था होने व निगरानी कमेटी द्वारा जांच करने के कारण भ्रष्टाचार बढ़ेगा।

स्कूल के गेट पर लगाएं शिक्षकों की टीम : डीआईओएस
मेरठ स्कूल फेडरेशन ने 28 व 29 अगस्त को स्कूल बसें न चलाने का निर्णय लिया है। इस संबंध में डीआईओएस गिरजेश चौधरी ने सभी विद्यालयों के प्रधानाचार्यों को निर्देश जारी किए हैं। डीआईओएस ने कहा है कि ऐसी स्थिति में अभिभावक अपने बच्चों को विद्यालय छोड़ने और लेने अपने वाहन से आएंगे। इससे स्कूल के बाहर जाम लगने की आशंका है। लिहाजा बच्चों की सुरक्षा के लिए विद्यालय के अध्यापकों की टीम विद्यालय के गेट पर लगाएं।

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