सहारनपुर में मस्जिद ध्वस्तीकरण के बाद सोमवार को एएसआई के सहायक पुरातत्व विशेषज्ञ ने स्थल पर मिले कुएं जैसी संरचना की जांच की। इसके बाद उन्होंने इसे उत्तर मध्यकालीन और करीब 200 से 250 वर्ष पुराना होने की संभावना व्यक्त की।
इसकी जांच रिपोर्ट शासन को भेजी जाएगी। उम्मीद जताई जा रही है कि करीब सप्ताहभर में जांच की रिपोर्ट प्रशासन को सौंप दी जाएगी। इसके बाद प्रशासन और शासन द्वारा ही कुएं की खोदाई और आगे सर्वे कराए जाने का निर्णय लिया जाएगा।
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कलक्ट्रेट परिसर में कुएं की जांच करने के लिए उतरते एएसआई के सहायक पुरातत्व अधिकारी
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बता दें, जांच के बाद सहायक पुरातत्व अधिकारी डॉ. मनोज कुमार यादव ने बताया था कि हर राजवंश में ईंटों का अपना इतिहास रहा है। कुएं जैसी संरचना में जिन ईंटों का इस्तेमाल हुआ है वह लखौरी ईंटें हैं।
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कलक्ट्रेट परिसर में कुएं की गहराई नापती टीम
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जमीयत उलमा-ए-हिंद के प्रतिनिधिमंडल ने की मुलाकात
उधर, सहारनपुर में जमीयत-उलमा-ए-हिंद के प्रतिनिधिमंडल ने मंगलवार को मस्जिद विध्वंस को लेकर समाज के विभिन्न लोगों से मुलाकात की। महासचिव मौलाना मुहम्मद हकीमुद्दीन कासमी ने कहा कि मामले से संबंधित सभी दस्तावेज और साक्ष्य एकत्र किए जा रहे हैं, जिन्हें अध्यक्ष मौलाना महमूद असद मदनी के समक्ष प्रस्तुत किया जाएगा। सहारनपुर के लोगों को इस मामले में जहां भी कानूनी सहायता की आवश्यकता होगी, जमीयत उलमा-ए-हिंद उनके साथ मजबूती से खड़ी रहेगी।
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मस्जिद प्रकरण में पूर्व सांसद हाजी फजलुर्रहमान से वार्ता करते जमीयत उलेमा-हिंद का प्रतिनिधिमंडल
- फोटो : संगठन
प्रतिनिधिमंडल ने सांसद इमरान मसूद, पूर्व सांसद हाजी फजलुर्रहमान, भूमि से जुड़े याकूब खान के पौत्र फिरोज खान और शाह हारून खान, एडवोकेट नौशाद तथा मुकदमे के पक्षकार एडवोकेट तनवीर अहमद सहित अन्य संबंधित लोगों से चर्चा की। अधिवक्ताओं के साथ विशेष बैठक कर मामले के सभी जटिल कानूनी पहलुओं पर गहन विचार-विमर्श किया गया।
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कलक्ट्रेट परिसर की मस्जिद के ध्वस्तीकरण के बाद मिला कुआं
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जमीयत उलमा-ए-हिंद के महासचिव मौलाना मुहम्मद हकीमुद्दीन कासमी ने मस्जिद के विध्वंस पर गहरा दुख और चिंता व्यक्त की गई। कहा कि जिस तरह से जल्दबाजी में कार्रवाई की गई। उससे शहर के लोगों में बेचैनी हुई है। इस दौरान मौलाना कासिम नूरी, मौलाना अली हसन मजाहिरी, मौलाना अजीमुल्लाह सिद्दीकी, मौलाना मुहम्मद यूसुफ कासमी आदि रहे।