Pics: जकार्ता में दमदार प्रदर्शन के बाद मेरठ लौटे आरवीसी के जांबाज घुड़सवार, अगला टारगेट 'गोल्ड'
आरवीसी पहुंचने पर हुआ जोरदार स्वागत
गौरतलब है कि फ्रांस के घोड़ों के साथ आरवीसी के जांबाजों ने मात्र छह माह तैयारी की, ये घोड़े अपने होते थे जवान देश के लिए सोना लेकर आते। इसकी कमी ओलंपिक में पूरी की जाएगी। जकार्ता में हुए एशियन गेम्स में घुड़सवारी में भारतीय टीम को सिल्वर मेडल दिलाने वाले आरवीसी के सवार राकेश कुमार, सवार जितेंद्र सिंह और एएएसी के मेजर आशीष मलिक का शुक्रवार को आरवीसी पहुंचने पर स्वागत किया गया।
फ्रांस वापस भेज दिए गए प्रतियोगिता में शामिल घोड़े
तीनों जांबाज घुड़सवारों को शानदार बग्घी में बिठाया गया। आरवीसी सेंटर के कमांडेंट मेजर जनरल अनिल कुमार सेना मेडल ने तीनों को बधाई दी। तीनों घुड़सवारों की कामयाबी की सबसे अहम बात ये रही कि जिन घोड़ों से तीनों ने इंवेटिंग में भाग लिया वे फ्रांस से खरीदे गए थे। जीत के बाद इन घोड़ों को वापस फ्रांस में भेज दिया गया है। जापान की जिस टीम ने घुड़सवारी में गोल्ड जीता है, उनके पास भी यूरोप के घोड़े थे। ये घुड़सवार कई सालों से इन्हीं घोड़ों के साथ स्पेशल ट्रेनिंग ले रहे थे। जबकि हमारे घुड़सवारों ने सिर्फ छह महीने ही फ्रांस में इन घोड़ों के साथ स्पेशल ट्रेनिंग ली। भारतीय घुड़सवारी टीम के कोच की भूमिका भी बेहद अहम रही।
ये हैं आरवीसी के जांबाज घुड़सवार
रिमाउंट ट्रेनिंग स्कूल एंड डिपोर्ट सहारनपुर
निवासी : खरकाली, बीबीनगर बुलंदशहर
2. सवार जितेंद्र सिंह पुत्र पहाड़ सिंह
रिमाउंट ट्रेनिंग स्कूल एंड डिपोर्ट सहारनपुर
निवासी : गांव मागरा, हरसानी, बाड़मेर राजस्थान
3. मेजर आशीष मलिक पुत्र हंसराज मलिक
222 एएससी सप्लाई
निवासी : देवलोक कालोनी, रोहतक, हरियाणा
तीनों की फ्रांस में स्पेशल ट्रेनिंग
इससे पहले एशियन गेम्स में मेडल पाने को आरवीसी के सवार राकेश कुमार लंबे समय से आरवीसी में अपने घोड़े विक्टरी लैप, सवार जितेंद्र सिंह अपने घोड़े गैबरियल और मेजर आशीष मलिक अपने घोड़े विरासत के साथ पसीना बहा रहे थे। तीनों ने फ्रांस में स्पेशल ट्रेनिंग ली तो उसके बाद उनको ट्रेनिंग वाले घोड़ों से ही प्रतियोगिता में भाग लेना पड़ा।