शहीद प्रशांत शर्मा की अंतिम यात्रा में देशभक्ति के जज्बे के साथ सैकड़ों युवा भी शामिल हुए। वहलना चौक पर ही काफी संख्या में युवा बाइकों पर पहुंच गए थे, जहां से काफिले के साथ शव को बुढ़ाना मोड़ खांजापुर लाया गया।
देखो कौन आया..पुलवामा का शेर आया, शहीद प्रशांत को अंतिम विदाई देने देशभक्ति का जज्बा लेकर निकले युवा
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कश्मीर में आतंकियों से मुठभेड़ में शहीद हुए प्रशांत शर्मा को लेकर जिले के युवाओं में गम और गुस्सा दोनो एक साथ दिखाई दिए। देशभक्ति के जज्बे से ओतप्रोत युवाओं की टोलियां शहर और अलग-अलग गांवों से शहीद के घर पर पहुंच गई थी।
जैसे ही पता लगा कि सेना की गाड़ी शव लेकर आ रही है तो रास्ते में ही सैकड़ों युवा तिरंगा लगी बाइक पर शव के आगे-आगे हो लिए। देशभक्ति के जज्बे के साथ इन युवाओं का जोश अलग ही देखने को मिला। भारत माता की जय, शहीद प्रशांत अमर रहें के नारों से फिजा गूंज उठी।
वहीं शहीद की अंतिम यात्रा में शामिल युवा जोश भरे अंदाज में नारे लगा रहे थे 'देखो-देखो कौन आया... पुलवामा का शेर आया'। युवाओं में पाकिस्तान को लेकर भी गुस्सा था और कोरोना महामारी का भय भी। इसके बावजूद इन युवाओं के देशभक्ति के जुनून को रोक नहीं पाया।
बुढाना मोड़ के खांजापुर गांव में सुबह छह बजे लोग अपने घरों से निकल सड़क पर आ गए थे। हर कोई भारत मां के लिए प्राण न्योछावर करने वाले शहीद प्रशांत के अंतिम दर्शन की चाह में था। शहीद के अंतिम संस्कार से पहले गांव में किसी के घर चूल्हा नहीं जला।
दो घंटे तक लोग शव का इंतजार करते रहे। गांव के बुजुर्ग सुरेश का कहना है कि उनके गांव का लड़का शहीद हुआ है। ऐसे में गांव के बच्चे-बच्चे की सहानुभूति शहीद के परिवार के साथ है। यह गम एक घर का नहीं पूरे गांव का है।