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भीड़ के सामने प्रशिक्षण का पाठ न भूले पुलिस, जानें किन बिंदुओं पर काम करने की सलाह देते हैं विशेषज्ञ

Thu, 06 Dec 2018 03:51 PM IST
मनु चौधरी, अमर उजाला, मेरठ
मनु चौधरी, अमर उजाला, मेरठ Updated Thu, 06 Dec 2018 03:51 PM IST
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police should not forget the training in front of uncontrolled crowd says specialist
काशी विद्यापीठ बवाल - फोटो : अमर उजाला

पुलिसकर्मियों को पुलिस प्रशिक्षण विद्यालय या पुलिस लाइन में तैनाती से पहले व्यावहारिक ज्ञान के साथ ही कई तरह का प्रशिक्षण दिया जाता है। उन्हें सिखाया जाता है कि यदि किसी तरह की आपात स्थिति आ जाए तो उस स्थिति में भीड़ से कैसे निपटा जाना चाहिए। यही नहीं, तैनाती के दौरान भी हर सप्ताह पुलिस लाइन में परेड में भी प्रशिक्षण दिया जाता है। लेकिन अधिकांश मामलों में देखने में आता है कि पुलिसकर्मी प्रशिक्षण के खास पहलुओं को ऐसे मौकों पर भूल जाते हैं। आगे जानें विशेषज्ञों के मुताबिक किस प्रकार से भीड़ के सामने पुलिसकर्मियों को किस प्रकार काम करना चाहिए:- 

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1992 बैच के पीपीएस अफसर डॉ. बीपी अशोक

पुलिस विभाग के विशेषज्ञ बताते हैं कि प्रशिक्षण के दौरान वह सब सिखाया जाता है कि किस स्थिति में क्या किया जाए। भीड़ चाहे जाम लगाए, धरना दे या फिर उपद्रव करे। भीड़ कम हो या अधिक, हमेशा पुलिस को माहौल भांपकर काम करना चाहिए। नहीं तो जरा सी लापरवाही से स्थिति बिगड़ती चली जाती है।

1992 बैच के पीपीएस अफसर डॉ. बीपी अशोक वर्तमान में यहां एसपी क्राइम तैनात हैं। इससे पहले वह लखनऊ, आगरा और मेरठ में ही एसपी सिटी रह चुके हैं। विशेषज्ञ के तौर पर उनका कहना है कि कानून व्यवस्था को देखते हुए करीब ढाई दशक हो गए। सामने कितनी भी भीड़ हो, पुलिस ट्रेनिंग का पार्ट न भूलें। भीड़ की स्थिति भांप लेना चाहिए। भीड़ की कैसी स्थिति है, यह मौके पर पहुंचते ही समझ लेना चाहिए। मोबाइल या वायरलेस सेट से उच्च अधिकारियों को जरूर जानकारी दें। जितनी जल्दी हो फोर्स को मौके पर बुलाएं। चाहे थाना प्रभारी या चौकी इंचार्ज हो या अन्य कोई भी पुलिस अफसर, पुलिस की गाड़ी में सुरक्षा उपकरण जैसे डंडे, हेलमेट, बॉडी प्रोटेक्टर जैकेट जरूर होनी चाहिए।  

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बुलंदशहर में बवाल - फोटो : अमर उजाला

सबसे पहले बचाएं 
विशेषज्ञ के अनुसार यदि भीड़ में कोई भी पुलिसकर्मी घिरने जैसी स्थिति में हो तो साथी पुलिसकर्मी सबसे पहले बचाएं। यदि बंद कमरे, चौकी या कहीं भी भवन में पुलिसकर्मी या अधिकारी फंसा हो तो उसे बाहर निकाल लें। जितने भी पुलिसकर्मी मौके पर हों, सभी को एकजुट होकर रहना चाहिए। भीड़ यदि हमला करे या पुलिस को निशाना बनाए, तो पुलिसबल को एकजुट होकर बचाव करना चाहिए।  

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up police

अपने विवेक से लें निर्णय
विशेषज्ञ का कहना है कि भीड़ को खदेड़ने के लिए पानी की बौछार करें। सफलता न मिले तो आंसू गैस के गोले छोड़ें। यह गोले हवा के कोण को देखकर 45 से 60 डिग्री कोण पर छोड़े जाते हैं। परिस्थितियों के अनुसार रबर बुलेट का इस्तेमाल कर सकते हैं। यदि कोई पुलिसकर्मी घिर गया या भीड़ ने घेरकर हमला कर दिया तो ऐसी स्थिति में विवेक के अनुसार वह निर्णय लें, जिसमें जन धन की हानि न हो।

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Bulandshahr - फोटो : अमर उजाला

हाल के बड़े घटनाक्रम
2 अप्रैल 2018:
एससीएसटी प्रकरण को लेकर कंकरखेड़ा मेरठ की शोभापुर पुलिस चौकी में सिपाहियों को बंद कर आग लगा दी गई थी। जिसमें पुलिस चौकी जल गई थी। शहर में डॉ. आंबेडकर चौक पर इंस्पेक्टर नौचंदी पर हमला कर जीप फूंक दी गई थी। सैकड़ों वाहनों में उपद्रवियों ने तोड़फोड़ की थी।

3 दिसंबर 2018: बुलंदशहर में गोकशी के विरोध में भीड़ ने स्याना कोतवाली की चिंगरावठी चौकी में आग लगा दी थी। बवाल में स्थानीय निवासी सुमित और इंस्पेक्टर स्याना सुबोध कुमार की मौत हो गई थी। सीओ स्याना को चौकी में बंद कर जिंदा जलाने की कोशिश की गई। 

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