बड़ी कार्रवाई: पूर्व एमएलसी हाजी इकबाल और उसके बहनोई के मकान पर पुलिस ने चस्पा किए गैर जमानती वारंट
इकबाल उर्फ बाला व उसके पुत्रों एवं रिश्तेदार पर थाना मिर्जापुर पर धोखाधड़ी, अवैध कब्जे और अनुसूचित जाति एवं जनजाति के सदस्यों की जमीन धोखाधड़ी से कब्जाने के अलावा महिला को अपने घर पर बंधक बनाकर दुष्कर्म करने का मामला महिला थाने में दर्ज है।
हाजी इकबाल द्वारा उच्च न्यायालय इलाहाबाद में तीनों उक्त तीन मामलों में अग्रिम जमानत दाखिल की गई थी, जिसे उच्च न्यायालय ने खारिज कर दिया था। उसकी अग्रिम जमानत खारिज किए जाने पर बाद उसकी और अन्य आरोपियों की गिरफ्तारी के लिए पुलिस की ओर से यहां न्यायालय में गैर जमानती वारंट के लिए आवेदन किया गया।
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एसएसपी ने बताया कि महिला थाना पुलिस द्वारा प्रभावी पैरवी पर न्यायालय ने हाजी इकबाल उर्फ बाला और उसके बहनोई दिलशाद के गैर जमानती वारंट जारी किए थे। एसएसपी ने बताया कि उसकी गिरफ्तारी के लिए विशेष ऑपरेशन ग्रुप व पुलिस की कई टीमें लगाई गई हैं।
पूर्व एमएलसी हाजी इकबाल के नौकर नसीम की जमानत याचिका को न्यायालय ने खारिज कर दिया है। वहीं, नौकर ने आरोप लगाए हैं कि उससे कागजातों पर जबरन हस्ताक्षर कराए गए थे। हाजी इकबाल ने अपने नौकर नसीम के नाम 22 करोड़ की संपत्ति जुटा रखी थी।
इतना ही नहीं उसे तीन चीनी मिल का मालिक भी बना रखा है। पुलिस ने गैंगस्टर के मामले में नसीम के नाम की गई बेनामी संपत्ति को कुर्क कर लिया था। मिर्जापुर थाने पर दर्ज गैंगस्टर के मामले में मिर्जापुर पुलिस ने मई में नौकर नसीम को गिरफ्तार कर जेल भेज दिया था। तभी से वह जेल में बंद है।
नसीम की ओर से उसके अधिवक्ता ने न्यायालय में जमानत के लिए याचिका दाखिल की, जिसमें नसीम ने हाजी इकबाल और उसके परिवार के सदस्यों पर भी आरोप लगाए। नसीम ने कहा कि वह हाजी इकबाल के खनन पट्टे पर नौकरी करता था। वर्ष 2008 में उससे जबरन कुछ दस्तावेजों पर हस्ताक्षर कराए गए थे। वर्ष 2015 के बाद उसे मानदेय भी नहीं दिया गया। इसलिए वर्ष 2017 में उसने नौकरी छोड़ दी।
जमानत प्रार्थनापत्र में नसीम का कहना है कि उसे जान से मारने की धमकी तक दी गई। नसीम ने खुद पर लगे आरोपों को झूठा बताया। शासकीय अधिवक्ता विक्रम सिंह ने बताया कि मामले की सुनवाई एडीजे कक्ष संख्या तीन की न्यायालय में चल रही है। न्यायालय ने नसीम की जमानत याचिका को खारिज कर दिया है।