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पुलिस-प्रशासन का दावा, मेरठ में अब नहीं रेड लाइट एरिया लेकिन हकीकत कुछ और है जनाब 

Sun, 20 Jan 2019 02:55 PM IST
दुष्यंत शर्मा न्यूज डेस्क, अमर उजाला, मेरठ
न्यूज डेस्क, अमर उजाला, मेरठ Published by: दुष्यंत शर्मा Updated Sun, 20 Jan 2019 02:55 PM IST
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Police-administration claim there is no red light area in Meerut but reality is something else
red light area meerut

इलाहाबाद उच्च न्यायालय में दाखिल जनहित याचिका में सरकार की तरफ से रेड लाइट एरिया प्रकरण में जिला पुलिस-प्रशासन ने अपना जवाब दाखिल किया। जवाब में सरकार की ओर से दावा किया गया है कि मेरठ में अब कोई रेड लाइट एरिया नहीं है। वहीं, सरकार के इस जवाब से याचिकाकर्ता ने नाइत्तफाकी जताई है। आगे जानें क्या है यहां की असली हकीकत: -

Police-administration claim there is no red light area in Meerut but reality is something else
red light area meerut

ये है मामला 
समाजसेवी और हाईकोर्ट के अधिवक्ता सुनील चौधरी द्वारा मेरठ के रेडलाइट एरिया को लेकर एक जनहित याचिका दायर की गई थी। इस याचिका पर हाईकोर्ट द्वारा सरकार से जवाब मांगा गया तो डीएम, एसएसपी, जिला प्रोबेशन और उद्धार अधिकारी के माध्यम से जो जवाब भेजा गया है, वह बहुत ही चौंकाने वाला है। इस जवाब में कहा गया है कि जब भी हमें कोई सूचना मिलती है तो हम रेड लाइट एरिया में छापा डालकर महिलाओं को मुक्त कराते हैं। 

Police-administration claim there is no red light area in Meerut but reality is something else
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जनवरी 2018 में 41 महिलाओं को इम्मोरल ट्रैफिक प्रीवेंशन एक्ट 1956 के तहत मेरठ रेड लाइट एरिया से मुक्त कराया है। साथ ही साल 2010 में 21 सेक्स वर्करों को मेरठ कबाड़ी बाजार रेड लाइट एरिया से मुक्त कराकर उनको सिलाई कढ़ाई की ट्रेनिंग दिलाई गई थी और उनका इस तरह पुनर्वास कर समाज की मुख्यधारा से जोड़ा गया है। अब मेरठ में रेडलाइट एरिया नहीं है।


 
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Police-administration claim there is no red light area in Meerut but reality is something else
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अगली सुनवाई 25 जनवरी को

सामाजिक कार्यकर्ता सुनील चौधरी की जनहित याचिका की सुनवाई करते हुए मुख्य न्यायमूर्ति गोविंद माथुर व न्यायमूर्ति चंद्रधारी सिंह की खंडपीठ ने  अगली सुनवाई की तिथि 25 जनवरी नियत की है। अधिवक्ता व समाजसेवी सुनील चौधरी ने मांग की है कि कोठे बंद कराए जाएं। महिलाओं का पुनर्वास कराया जाए और उन्हें समाज की मुख्यधारा से जोड़ा जाए। याची ने उसे दलालों द्वारा याचिका वापस लेने की धमकी देने के आरोप में प्राथमिकी भी दर्ज कराई है और कोर्ट से सुरक्षा की मांग भी की है। 

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red light area Delhi

जिला क्षय रोग अधिकारी की रिपोर्ट से खुली कलई
सरकार द्वारा हलफनामा दाखिल करते समय जिला क्षय रोग अधिकारी की रिपोर्ट को नजरअंदाज कर दिया गया जिसमें जिला क्षय रोग अधिकारी ने यह बताया था कि मेरठ जिले में साल 2009 से लगातार रेड लाइट एरिया चल रहा है। जहां लगभग 75 कोठे हैं और 400 सेक्स वर्करों को अप्रैल, मई जून 2018 में 20 हजार से ज्यादा कंडोम का वितरण किया गया है। 

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