मेरठ जनपद में सरूरपुर क्षेत्र का गांव धनवालगढ़ उर्फ धनवाली खेड़ा के बारे में बताया जाता है कि हजारों वर्ष पूर्व आए भूचाल के कारण जमीन पलट गई थी। जिसके चलते गांव की जगह पर पेड़ व घासफूस उग आए थे। पुराने लोग बताते थे कि कुछ दिनों बाद महाभारत काल में पांचों पांडव वनवास के दौरान वनों में स्थित बरगद के पेड़ पर धनुर्धारी अर्जुन अपने धनुष बाण रखकर वनों में अपने भाइयों के साथ चले गए थे।
करीब 40 साल से उज्जड़ खेड़ा के आश्रम में रहने वाले मौनी बाबा बताते हैं कि किवदंती के अनुसार हजारों वर्ष पूर्व एक भूचाल आया था, जिसमें सब कुछ बर्बाद और तहस नहस हो गया था। सरकारी अभिलेखों में गांव धनवाली खेड़ा के नाम से रकबा देखा गया।
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गांव धनवालगढ़ उर्फ धनवाली खेड़ा
- फोटो : amar ujala
मौनी बाबा ने बताया कि आठ दशक से अधिक समय से आसपास के लोग इस मार्ग से हरिद्वार से पुरा महादेव कांवड़ जल लेकर जाते रहे हैं। पहले तो उस बरगद के नीचे जिस पर अर्जुन ने बाण रखे थे, उसके पास शिवभक्तों को पानी पिलाया जाता था। वहीं अब आश्रम में बने मंदिर पर शिव भक्त जलाभिषेक करते हैं।
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मंदिर
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बताया गया कि पिछले 25 सालों से उसी बरगद के नीचे शिविर लगाकर शिवभक्तों की सेवा की जाती है। वहीं मौनी बाबा ने बताया कि वर्तमान में गांव डाहर से जोड़ दिया गया है। यहां रकबा मात्र 35 बीघे रह गया है। जिस पर पांच मंदिरों के साथ यज्ञ स्थल व माता के मंदिर बने हैं।
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मौनी बाबा।
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इस गांव में दो शिव मंदिर हैं। हनुमान व काली के मंदिर के साथ भगवान गणेश के मंदिर का भी निर्माण किया गया है। ब्लॉक के रिकॉर्ड में इस गांव की केवल एक ही वोट है। जो वहां के मौनी बाबा की है।
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मंदिर।
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बाबा ने बताया कि गांव के शिव मंदिर में जलाभिषेक करने के लिए हजारों शिवभक्त आते हैं। शिवभक्तों की सेवा के लिए आसपास के ग्रामीणों की मदद से 24 घंटे भंडारे का आयोजन किया जा रहा है।