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नौकरी की नहीं दरकार, यहां सराफा बाजार संभाल रहीं बेटियां, बेटों को भी लुभा रहा ये पुश्तैनी कारोबार

Sun, 09 Jun 2019 05:01 PM IST
Dimple Sirohi शालू अग्रवाल, अमर उजाला, मेरठ
शालू अग्रवाल, अमर उजाला, मेरठ Published by: Dimple Sirohi Updated Sun, 09 Jun 2019 05:01 PM IST
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Not a job, youth is loving Ancestral business, daughters taking over the bullion market in Meerut
गहने खरीदती महिला - फोटो : अमर उजाला

महंगी पढ़ाई के बाद मल्टीनेशनल कंपनी में नौकरी, फाइव फिगर सैलरी पैकेज। वर्तमान दौर के हर युवा की यही चाहत है। लेकिन एशिया की सबसे बड़ी सोना मंडी यानी मेरठ के सराफा बाजार में कारोबारियों की नयी पीढ़ी की सोच कुछ जुदा है।



इन युवाओं को टेक्सास, न्यूयार्क, लंदन, जापान नहीं, बल्कि देश में रहकर पिता के व्यवसाय में रमना पसंद आ रहा है। नई सोच, तकनीकी खूबियों से लबरेज ये युवा नए जमाने की चाल में ढाल रहे हैं। गहनों के नए डिजायन से लेकर, ब्रांड को बढ़ावा देना, ग्राहकों को आकर्षित करने पर पूरा ध्यान दे रहे हैं।

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आरती - फोटो : अमर उजाला

प्राकृतिक रत्न सहित डायमंड का ऑनलाइन बिजनेस
शहर के मशहूर सराफा कारोबारी मनोहर लाल सराफ एंड संस के संचालक शेखर अग्रवाल की बेटी आरती शेखर भी पिता के कारोबार में हाथ बटा रही हैं। आज से लगभग छह साल पहले आरती ने पापा के बिजनेस में अपना साथ देते हुए हीरो की ऑनलाइन खरीद-फरोख्त का काम शुरू किया।

अपनी वेबसाइट बनाई और डायमंड का बिजनेस बढ़ाया। गोल्ड बिजनेस के साथ डायमंड बिजनेस भी एमएलएसएस की पहचान बन गया। इसके साथ ही आरती ने प्राकृतिक रत्नों का काम शुरू किया। आरती ने जेमेलोजिकल इंस्टीट्यूट ऑफ अमेरिका से रत्नों की शिक्षा ली। इसके बाद उन्होंने विदेश में नौकरी का रास्ता नहीं अपनाया बल्कि पापा के बिजनेस को बढ़ाया।  

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हिमांगी - फोटो : अमर उजाला

बहुओं के साथ ने बढ़ाया कारोबार
सराफा कारोबार में 25 साल से अधिक समय पूरा कर चुके भगत ज्वैलर्स की अपनी अलग पहचान है। आबूलेन आबूप्लाजा में भगत ज्वेलर्स का शोरूम लंबे समय से आभूषण प्रेमियों की चाहत पूरी कर रहा है। लेकिन बिजनेस को परिवार की दोनों बहुओं ने नया दृष्टिकोण दिया है। संचालक आकाश मांगलिक कहते हैं समय बदल रहा है, पसंद और जरूरतें भी बदल रही हैं। युवाओं को कैसे गहने पसंद है, उनको हम क्या नया दे सकते हैं यह तो युवा ही बता सकते हैं।

परिवार के बेटे आधार और उसके भाई ने दिल्ली से पढ़ाई कर बिजनेस संभाला, लेकिन हमारी दोनों बहुओं हिमांगी और श्वेता ने कारोबार को नए सिरे से संवार दिया। बड़ी बहू श्वेता ज्वेलरी के डिजायन और प्रजेंटेशन पर काम करती है। छोटी बहू हिमांगी जब से आई है तभी से ब्रांडिंग, प्रचार और प्रदर्शनी में वो सहयोग देती है। यही बदलाव आज वक्त की जरूरत है।

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अजय कुमार बेटे आकाश और आयुष के साथ - फोटो : अमर उजाला

एमबीए, इंजीनियरिंग छोड़ा, हीरो का काम जोड़ा
शहर में 105 साल पुरानी जोधामल कैलाशचंद फर्म को परिवार की नई पीढ़ी संभाल रही है। फर्म के संचालक अजय कुमार जैन के बेटे आकाश और आयुष दोनों पिताजी के कारोबार को पूरी रुचि के साथ संभाल रहे हैं। इतना ही नहीं दोनों बेटों ने उच्चशिक्षा ली लेकिन नौकरी की राह छोड़कर घर की ओर कदम बढ़ाए।

बेटा आकाश ने आईआईबीएम से एमबीए किया है तो दूसरे बेटे आयुष ने नागपुर से इंजीनियरिंग की है। आकाश कहते हैं बिजनेस में जो स्कोप है वो नौकरी में कहां। फिर घर का यह बिजनेस छोड़कर कहीं ओर जाना, परिवार से दूर रहना अच्छा नहीं लगता। इसलिए घर के काम को ही अपनाया। आयुष कहते हैं कि पहले हमारी फर्म सोने के आभूषणों के लिए मशहूर थी, लेकिन हमने हीरों का होलसेल कारोबार शुरू किया। आज हमारी फर्म, सिल्वर, गोल्ड और डायमंड हर ज्वेलरी में शामिल हो चुकी है। 

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प्रियांक - फोटो : अमर उजाला

इंजीनियरिंग की मगर संभाला बिजनेस 
मेरठ बुलियन ट्रेडर्स एसोसिएशन के अध्यक्ष प्रदीप अग्रवाल के बेटे प्रियांक अग्रवाल का सपना इंजीनियर तो कभी इंटीरियर डिजायनर बनना था। यही वजह रही कि प्रियांक अग्रवाल ने कुरुक्षेत्र विवि से इंजीनियरिंग की शिक्षा ली। पोस्ट ग्रेजुएशन की डिग्री ली और जॉब में जाने का मन बना लिया। लेकिन मन नहीं लगा तो लौटकर पिता के कारोबार में आ गए।

इसके बाद प्रियांक ने जैमेलोजिकल इंस्टीट्यूट मुंबई से डायमंड ग्रेजुएट की शिक्षा लेकर पिता के कारोबार को संभाल लिया। प्रियांक ने अटायर के नाम से अपना डायमंड ब्रांड शुरू किया। पिता ने आरएमपी ज्वैलर्स प्राइवेट लिमिटेड का काम चलाया तो बेटे ने इस काम को बढ़ाते हुए हीरो का काम शुरू किया और फर्म को एक नई गति दी। बकौल प्रियांक नौकरी से बेहतर है कि अपना काम संभालें। इस काम में खुशी भी मिल रही है।
 

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