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Nirbhaya Case: फांसी के तख्ते पर गिड़गिड़ा रहे थे दरिंदे, जल्लाद बोला-जिंदगी भर नहीं भूलूंगा ये ऐतिहासिक दिन
Sat, 21 Mar 2020 09:02 AM IST
शाहरुख खान
अमर उजाला नेटवर्क, मेरठ
अमर उजाला नेटवर्क, मेरठ
Published by: शाहरुख खान
Updated Sat, 21 Mar 2020 09:02 AM IST
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पवन जल्लाद ने निर्भया के दोषियों को फांसी देने की इच्छा जाहिर की
- फोटो : अमर उजाला
शुक्रवार तड़के 3:30 बजे तिहाड़ जेल में एक पुलिसकर्मी ने मेरे कमरे का दरवाजा खटखटाया। उसने तैयार हो जाने का कहा। कुछ ही देर में बाहर से आवाजें आने लगीं। करीब 4:30 बजे कई अफसर मेरे पास आए। हालचाल पूछा। डॉक्टर ने मेरा चेकअप किया। उसके बाद मैं फांसीघर पहुंचा तो जेल के अधिकारी एक निश्चित दूरी पर खड़े थे।
पवन जल्लाद
- फोटो : अमर उजाला
पहले दो दरिंदों को एक साथ लाया गया। उनके चेहरे कपड़े से ढके थे। दोनों को दो अलग-अलग तख्तों पर खड़ा किया गया। उनके हाथ बंधे थे। फांसी का समय हुआ तो एक अफसर ने मुझे इशारा किया। मैं फांसी देने चला तो उनमें से एक गिड़गिड़ाने लगा, लेकिन मैंने अपना कर्म निभाया। दोनों को फांसी के फंदे पर लटका दिया। डॉक्टरों के चेक करने के बाद उन्हें फंदे से उतारा गया।
nirbhaya case
- फोटो : अमर उजाला
उसके बाद दो अन्य दरिंदों को भी फांसी पर लटकाया। शुक्रवार रात निर्भया के साथ दरिंदगी करने वाले चारों दोषियों को फांसी पर लटकाने के बाद मेरठ लौटे पवन जल्लाद ने यह बातें बताईं। पवन कांशीराम कॉलोनी स्थित अपने घर पहुंचे तो उनसे मिलने वालों का तांता लग गया। हर कोई उनसे जानने के लिए उत्सुक था कि उन्होंने दरिंदों को कैसे फांसी दी।
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निर्भया के दोषी
- फोटो : सोशल मीडिया
17 को तिहाड़ जेल पहुंचे थे पवन
पवन ने बताया कि 17 मार्च को मेरठ से दिल्ली की तिहाड़ जेल ले जाया गया। था। वहां जेल अधिकारियों ने फांसीघर दिखाया। रहने को अलग कमरा दिया। कहा कि किसी भी सामान की जरूरत पड़े तो कभी भी मांग लेना। 18 और 19 मार्च को वहां खामोशी सी छाई थी। आते जाते कर्मचारी और अफसर यही कहते थे कि फांसी की तारीख 20 मार्च की सुबह है। 19 मार्च की शाम से जेल में सब कर्मचारी और अधिकारी चुपचाप नजर आने लगे।
पवन ने बताया कि 17 मार्च को मेरठ से दिल्ली की तिहाड़ जेल ले जाया गया। था। वहां जेल अधिकारियों ने फांसीघर दिखाया। रहने को अलग कमरा दिया। कहा कि किसी भी सामान की जरूरत पड़े तो कभी भी मांग लेना। 18 और 19 मार्च को वहां खामोशी सी छाई थी। आते जाते कर्मचारी और अफसर यही कहते थे कि फांसी की तारीख 20 मार्च की सुबह है। 19 मार्च की शाम से जेल में सब कर्मचारी और अधिकारी चुपचाप नजर आने लगे।
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Nirbhaya case
- फोटो : अमर उजाला
भगवान से की दुआ, अब ना बच पाएं दरिंदे
बतौर जल्लाद मुझे रात भर नींद नहीं आई। मैं भगवान से हाथ जोड़कर यही दुआ करता रहा कि भगवान यह 130 करोड़ लोगों के लिए इंसाफ की घड़ी है। इस बार दरिंदों को मत बचाना। उस परिवार को इंसाफ दिलाना, जिसने अपनी बेटी को खोया। मैंने रात 8 बजे खाना खाया। कमरे में आकर एक अफसर ने कहा कि पवन फांसी के लिए तैयार रहना। मुझे रात 11 बजे तक पता चला कि जेल में वहां के जो बंदी हैं उनमें बड़ी बेचैनी थी। जिन चार दरिंदों को फांसी दी जानी थी, शायद उन्हें अलग बैरक में रखा गया था।
बतौर जल्लाद मुझे रात भर नींद नहीं आई। मैं भगवान से हाथ जोड़कर यही दुआ करता रहा कि भगवान यह 130 करोड़ लोगों के लिए इंसाफ की घड़ी है। इस बार दरिंदों को मत बचाना। उस परिवार को इंसाफ दिलाना, जिसने अपनी बेटी को खोया। मैंने रात 8 बजे खाना खाया। कमरे में आकर एक अफसर ने कहा कि पवन फांसी के लिए तैयार रहना। मुझे रात 11 बजे तक पता चला कि जेल में वहां के जो बंदी हैं उनमें बड़ी बेचैनी थी। जिन चार दरिंदों को फांसी दी जानी थी, शायद उन्हें अलग बैरक में रखा गया था।