कृषि कानूनों के विरोध में एक तरफ दिल्ली बाॅर्डर पर किसानों का प्रदर्शन जारी है, वहीं पश्चिमी यूपी में किसानों ने कृषि कानूनों के विरोध और गन्ने की फसल का सही दाम नहीं मिलने से नाराज किसानों ने विरोध का नया तरीका अपनाया है।
खेतों में लहलहाती फसलों पर आखिर क्यों ट्रैक्टर चला रहे यूपी के किसान, इन जिलों में नष्ट की सैकड़ों बीघा फसल
मुजफ्फरनगर के चरथावल विकास खंड क्षेत्र के गुरुवार को ग्राम पावटी में किसान ने कृषि कानूूनों के विरोध में पांच बीघा सरसों की फसल जोत दी। भाकियू चरथावल ब्लॉक अध्यक्ष ठाकुर कुशलवीर सिंह के साथ किसानों ने हंगामा किया।
चरथावल सहकारी समिति के पूर्व सभापति प्रवीण त्यागी किसानों के साथ खेत पहुंचे और उन्होंने पकने को तैयार खड़ी सरसों की फसल में ट्रैक्टर चलाकर फसल को नष्ट कर दिया।
उनका कहना था कि केंद्र सरकार किसानों पर थोपे गए कानूनों का वापस ले और एमएसपी पर खरीद की गारंटी के लिए कानून बनाया जाए। किसानों का कहना था कि बड़ी उम्मीद के साथ किसानों ने पूर्ण बहुमत के साथ सरकार बनवाई थी, लेकिन सरकार किसानोें का हक कुचलना चाहती है।
बिजनौर में हल्दौर थानाक्षेत्र के गांव शादीपुर कलां में भाकियू के एक वरिष्ठ नेता ने कृषि कानून के विरोध में अपनी पांच बीघा खड़ी गेहूं की फसल ट्रैक्टर हैरो से जोतकर बर्बाद कर दी।
उधर, महिलाओं ने भी अब कमान थाम ली है। महिलाएं घर घर जाकर अन्य महिलाओं को कृषि कानूनों को वापस कराए जाने के विरोध में प्रदर्शन करने के लिए जागरूक करने में लगी हैं।
गांव शादीपुर कलां में गुरुवार दोपहर भाकियू के मंडल उपाध्यक्ष कुलबीर सिंह ने कृषि कानून के विरोध में पांच बीघा गेहूं की फसल जोत दी। कुलबीर सिंह का कहना है कि सरकार तीनों कृषि कानूनों को किसानों पर थोपना चाहती है, जबकि किसान इन विधायकों के पुरजोर विरोध में हैं। इस बार भी किसानों के गन्ने का मूल्य नहीं बढ़ाया गया।