बागपत में यमुना नदी पार कर खेतों तक जाना फिर किसानों के लिए मुसीबत बन गया। काठा नाव हादसे का दर्द अभी बागपत भूला भी नहीं है कि सोमवार को मवी कलां गांव के सामने हादसा हुआ। भैंसा-बुग्गी यमुना नदी के बीच तेज बहाव में फंसकर पलट गई। इससे एक ही परिवार के चार सदस्य डूब गए। पिता-पुत्र ने किसी तरह तैरकर जान बचा ली। जबकि एमए की छात्रा और उसकी मां नदी में समा गई। नदी में डूबने से भैंसें की मौत हो गई।
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घटना की जानकारी देता किसान
- फोटो : अमर उजाला
हादसे की सूचना पर सैकड़ों ग्रामीण मौके पर जमा हो गए। हादसे की सूचना मिलते ही डीएम और एसपी फोर्स के साथ मौके पर पहुंचे। एनडीआरएफ की टीम ने पहुंचकर नदी में मां-बेटी की तलाश की, लेकिन उनका कोई सुराग नहीं मिल पाया। स्थानीय गोताखोर भी नदी में दोनों की तलाश कर रहे हैं।
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मां बेटी का पता चलने के इंतजार में बैठी महिलाएं
- फोटो : अमर उजाला
ग्रामीणों ने बुग्गी व भैंसें के शव को बाहर निकाला
काठा गांव निवासी 65 वर्षीय किसान सहेंद्र की यमुना नदी के पार पांच बीघा कृषि भूमि है। जिसमें गन्ने की फसल खड़ी हुई है। सोमवार को सुबह करीब छह बजे ईस्टर्न पेरिफेरल एक्सप्रेस-वे के पुल के पास से यमुना नदी पार करने लगे तो पानी का बहाव तेज होने के कारण भैंसा-बुग्गी नदी में पलट गई।
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परिवार के यमुना नदी में डूबने की सूचना पर मौके पर एकत्रित ग्रामीण
- फोटो : अमर उजाला
बुग्गी में सवार किसान सहेंद्र, उसकी पत्नी राजबीरी (50), बेटी कोमल (20), दिव्यांग बेटा नीटू (30) नदी में डूब गए। किसान सहेंद्र और उसके बेटे नीटू ने तैरकर अपनी जान बचा ली, लेकिन मां-बेटी नदी में समा गई। नदी किनारे ग्रामीणों की भीड़ लग गई। ग्रामीणों ने पुलिस को हादसे की सूचना दी।
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मां बेटी की तलाश में जुटे ग्रामीण व गोताखोर
- फोटो : अमर उजाला
पुलिस गोताखोरों को साथ पहुंची। मां-बेटी की तलाश कराई, लेकिन उनका कोई पता नहीं चला। एनडीआरएफ टीम को बुलाया । टीम ने यमुना नदी में कई किमी तक मोटर बोट से मां-बेटी की तलाश की। शाम तक भी उनका कुछ पता नहीं चल सका था।