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मोहम्मद रफी को यूपी के उस्ताद ने बनाया था 'सुरो का सरताज', इस शख्स के पास हैं सुबूत

Sun, 23 Dec 2018 05:38 PM IST
Dimple Sirohi न्यूज डेस्क, अमर उजाला, मेरठ
न्यूज डेस्क, अमर उजाला, मेरठ Published by: Dimple Sirohi Updated Sun, 23 Dec 2018 05:38 PM IST
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Mohammad Rafi was taught music by the master from up saharanpur up here is proof
मोहम्मद रफी

'चौहदवीं का चांद हो या....','बहारों फूल बरसाओ....', 'छू लेने दो नाजुक होंठों को....' और 'खिलौना जानकर तुम तो मेरा दिल तोड़ जाते हो...' ऐसे सैंकड़ों गीत हैं जो मोहम्मद रफी का नाम लेते ही जबान पर अनायास आ जाते हैं।  रफी साहब ने 24 दिसंबर को इस दुनिया में कदम रखा था। आज हर दिल में मोहम्मद रफी के गानों की एक खास जगह है, लेकिन आप शायद ही जानते होंगें कि रफी साहब ने जिस उस्ताद से संगीत की शिक्षा ली वह यूपी के सहारनपुर के रहने वाले थे और इसका सुबूत आज भी मौजूद है। मोहम्मद रफी जन्मदिवस पर आज हम आपको बता रहे हैं उस सख्श के बारे में जिनसे संगीत की तालीम लेकर माहम्मद रफी बन गए थे 'सुरों के सरताज' :- 

Mohammad Rafi was taught music by the master from up saharanpur up here is proof
मोहम्मद रफी

सदी के महान गायक मोहम्मद रफी अपनी दमदार आवाज की बदौलत दुनिया भर के करोड़ों दिलों पर आज भी राज कर रहे हैं लेकिन इसका बड़ा श्रेय जाता है उनके उस्ताद अब्दुल वहीद खां को, मोहम्मद रफी ने जिनसे संगीत की शिक्षा ली वह सहारनपुर में जन्मे थे। जानकारों की मानें तो अब्दुल वहीद खां ने लाहौर से आकर अंतिम सांस भी सहारनपुर में ही ली थी।

Mohammad Rafi was taught music by the master from up saharanpur up here is proof
सुशील नाज - फोटो : अमर उजाला

कैराना घराने ने हिन्दुस्तान ही नहीं, बल्कि दुनिया को बड़े-बड़े उस्ताद दिए हैं, जिनमें पंडित भीमसेन जोशी, अब्दुल करीम खां, गंगुबाई हंगल आदि शामिल हैं। सहारनपुर के नानौता कस्बे के गांव लुहारी में जन्मे उस्ताद अब्दुल वहीद खां भी कैराना घराने से संगीत सीखकर निकले थे, जो लाहौर में संगीत की शिक्षा देते थे। अब्दुल वहीद खां को कम सुनाई देता था। ऐसे में कुछ लोग उन्हें बहरे वहीद खां भी कहते थे। इस बात के प्रमाण यहां संगीत की शिक्षा दे रहे सुशील नाज के पास मौजूद हैं। उनके पास संगीत विशारद नाम की पुस्तक है, जिसमें कैराना घराने का पूरा इतिहास दर्ज है।

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मोहम्मद रफी

सहारनपुर के सुशील नाज बताते हैं कि अमृतसर के गांव कोटला सुल्तान सिंह में जन्मे मोहम्मद रफी देश के बंटवारे से पहले संगीत की शिक्षा लेने के लिए लाहौर में उस्ताद बड़े गुलाम अली खां के पास गए थे। मगर बड़े गुलाम अली खां के अधिक व्यस्त रहने की वजह से उनकी बात नहीं बन सकी थी। इसी दौरान किसी ने उन्हें लाहौर में ही संगीत की शिक्षा देने वाले उस्ताद अब्दुल वहीद खां से मिलने की सलाह दी।


 
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मोहम्मद रफी

मोहम्मद रफी ने लाहौर में करीब 12 साल तक अब्दुल वहीद खां से संगीत की शिक्षा ली। सुशील ने बताया कि अब्दुल वहीद खां की ससुराल सहारनपुर में मिगलानी बिल्डिंग के सामने स्थित क्षेत्र में थी। उनका दावा है कि अपने अंतिम समय में अब्दुल वहीद खां लाहौर से कैराना चले आए थे। उन्होंने अंतिम सांस सहारनपुर में ली थी। यह भी दावा है कि उनका शरीर थाना कुतुबशेर के पीछे बने कब्रिस्तान में दफनाया गया था।

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