15 दिसंबर 2019 को छावनी स्थित सेंट जोंस चर्च की स्थापना के 200 वर्ष पूरे हो रहे हैं। ब्रिटिश हुक्मरानों के जमाने वाले इस गिरिजाघर में लगे पुराने शिलापटों से इतिहास झांकता है। नक्काशी की शिल्पकारी से सजी चर्च की दीवारों से लेकर लकड़ी का पोडियम भी किसी घटना का किस्सा कहता है। इन सबके बीच प्रेयर हॉल में रखा पाइप ऑर्गन आज भी श्रद्धालुओं के आकर्षण का केंद्र है। संगीत विशेषज्ञ बताते हैं कि पाइप ऑर्गन वो दुर्लभ वाद्य यंत्र है, जिसकी सामान्य ध्वनि आधा किमी तक सुनाई देती है।
ये है 200 साल पुराना ऐतिहासिक चर्च, पढ़िए- क्या है इसकी खूबियां, तस्वीरें भी देखें
चर्च की पादरी रिनवी नोयल कहती हैं यह ऐतिहासिक पाइप ऑर्गन है, हमारा प्रयास है कि इसे पुन: बजाया जाए। 1893 में यह पाइप ऑर्गन सेंट जोंस चर्च में लगाया गया था। यह देश का तीसरा सबसे बड़ा पाइप आर्गन है। आर्गन को बजाने के मैकेनिज्म में हवा की अहम भूमिका है। ऑर्गन को हाथ, पैर दोनों से बजाया जाता है। हवा के दबाव के साथ ऑर्गन बजता है। बजाने के लिए चार लोगों की जरूरत होती है। दो लोग आगे और दो पीछे बैठते हैं।
यहां जीवित हैं अंग्रेजों के शासनकाल की निशानियां
सेंट जोंस बैपटिस्ट गैरीसन चर्च की स्थापना 1819 में रेव्ह. हेनरी फिशर ने की थी। चर्च की वर्तमान रेव्ह. रिनवी नोयल ने बताया कि चर्च के संस्थापक हेनरी फिशर इंग्लैंड में एक चर्च के पादरी थे।
यह चर्च उत्तर भारत में सबसे पुराना चर्च होने के कारण दर्शनीय है। चर्च लोकप्रिय अंग्रेजी पेरिस चर्च वास्तुकला की शैली के अनुसार है। फर्नीचर करीब दो सौ वर्ष पुराना है।
पाइप ऑर्गन विदेशी वाद्य यंत्र है, इसके विशालकाय आकार के कारण इससे स्टेज परफार्मेंस नहीं हो सकती। हिंदुस्तान के कुछ गिरजाघरों में ये ऐतिहासिक पाइप ऑर्गन है। आकार में बड़े होने के कारण इनकी ध्वनि भी काफी दूर तक जाती है। लगभग आधा किमी तक इनका संगीत बिना किसी माइक, लाउडस्पीकर के सुनाई देती है। - पद्मश्री, ग्रैमी अवार्ड सम्मानित पंडित विश्वमोहन भट्ट, मोहन वीणा वादक
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