उत्तर प्रदेश के मेरठ में सरदार वल्लभ भाई पटेल कृषि एवं प्रौद्योगिकी विश्वविद्यालय के वेटरनरी कॉलेज के डीन प्रोफेसर राजबीर सिंह पर जानलेवा हमले के मामले का सनसनीखेज खुलासा हुआ है। वेटरनरी कॉलेज के डीन प्रोफेसर राजबीर सिंह की हत्या कराने की खौफनाक योजना महिला प्रोफेसर आरती और उसके बिल्डर दोस्त अनिल ने तैयार की थी। जिस वक्त भाड़े के शूटर डीन पर विश्वविद्यालय के पास गोलियां बरसा रहे थे तब प्रोफेसर आरती अपने बिल्डर दोस्त अनिल के साथ शॉप्रिक्स मॉल में शॉपिंग कर रहे थे। ये भी प्लानिंग का हिस्सा था, ताकि पुलिस को उन पर शक न हो।
शूटर डीन पर बरसा रहे थे गोलियां: बिल्डर संग मॉल में शॉपिंग कर रही थी प्रोफेसर आरती भटेले, दोनों के थे खौफनाक इरादे
वारदात से पहले बिल्डर अनिल ने प्रोफेसर डॉक्टर आरती को व्हाट्सएप कॉल करके अपने पास बुला लिया था। करीब 3:30 बजे अनिल और आरती शॉपिंग करने के बहाने फ्लैट से निकल गए। ये दोनों की योजना का हिस्सा था। ताकि उन पर किसी को शक न हो। शॉप्रिक्स मॉल में घूमने के बाद आरती और अनिल सदर बाजार में पहुंचे और फिर करीब 8:30 बजे फ्लैट पर लौटे। दोनों ने आपस में तय किया था कि अब वह न तो कॉल करेंगे और न ही मिलेंगे।
बिल्डर की बेटी को विवि में नौकरी का दिया था लालच
पुलिस के मुताबिक पूछताछ के दौरान आरोपी अनिल ने बताया कि आरती से उसके प्रेम संबंध हैं। इसकी जानकारी लगने पर उसकी पत्नी 2019 में उसे छोड़कर सिसौली गांव चली गई थी। बड़ा बेटा बेंगलुरु में नौकरी करता है और छोटा बेटा देहरादून में पढ़ाई कर रहा है। बेटी कृषि विश्वविद्यालय में पढ़ रही है। महिला प्रोफेसर आरती कहती थी कि डीन बनने के बाद वह उसकी बेटी की विश्वविद्यालय में ही नौकरी लगवा देगी। इसी लालच में उसने आरती के साथ मिलकर ये योजना बनाई है।
घर से फरार हो गई आरती भटेले
हमले की योजना में मुख्य आरोपी आरती भटेले का नाम सामने आया तो पुलिस ने उसकी तलाश में दबिश दी। वह घर से फरार मिली। पुलिस को शक कि आरती को जानकारी हो गई थी कि हमलावरों को गिरफ्तार कर लिया है। पुलिस आरती भटेले और नदीम की तलाश में लगी है। पुलिस ने आरती के परिवार व रिश्तेदारों से भी संपर्क किया है, ताकि कुछ उसका सुराग मिले।
जूनियर को चार्ज देने से पहुंचती थी ठेस
पुलिस के अनुसार बिल्डर अनिल ने बताया कि प्रोफेसर आरती भटेले डॉ. राजबीर सिंह के व्यवहार से भी आहत थी। वह कहती थी कि अवकाश पर जाते समय डॉ. राजबीर सिंह डीन का कार्यभार उससे जूनियर डॉ. विजय को देकर जाते हैं। इससे उसके आत्मसम्मान को ठेस पहुंचती है।