शोपियां में शहीद हुए मेजर मयंक विश्नोई की शहादत पर हर आंख नम है। रविवार शाम को शहीद का गमगीन माहौल में पूरे सैन्य सम्मान के साथ अंतिम संस्कार किया गया। वहीं सोमवार को भी शहीद के आवास पर परिवार को सांत्वना देने आने वालों का तांता लगा रहा। मेजर मयंक की शहादत पर उनके दोस्तों को गर्व तो है लेकिन दोस्त को खोने के गम ने उन्हें भी तोड़कर रख दिया है।
मेरठ: मशहूर थी तीन दोस्तों की तिकड़ी, मेजर मयंक की शहादत पर भावुक हुए दोनों जिगरी यार
मेजर मयंक ने 12 वीं तक की शिक्षा केवी पंजाब लाइंस से प्राप्त की। स्कूल में उनका सिर्फ एक मित्र नंगलाताशी निवासी अमन रहा। अमन आजकल एयरफोर्स में टेक्निकल विभाग में कार्यरत हैं। इसके अतिरिक्त एक और मित्र दिशांत शर्मा रहा, जो शिवलोकपुरी में मयंक के पड़ोस में रहता है। दिशांत ने कृष्णा पब्लिक स्कूल से 12 वीं कक्षा उत्तीर्ण की और आजकल पीएनबी में कार्यरत हैं।
तीनों मित्र गोविंदपुरी में चीनू भाई के यहां गणित का ट्यूशन पढ़ने साथ जाते थे। दिशांत ने बताया कि दसवीं और बारहवीं कक्षा में मयंक ने 90 प्रतिशत से अधिक अंक प्राप्त किए। पूरे मोहल्ले के बच्चों को मयंक का ही उदाहरण दिया जाता था।
देश सेवा का था अटूट जज्बा
सेना में बॉर्डर पर तैनात रहने के लिए कुछ अनिवार्य नियम होते हैं। हिल एरिया में कार्य करने के लिए समय सीमा निर्धारित होती है। दिशांत ने बताया कि मेजर मयंक बॉर्डर की ही पोस्टिंग मांगते थे। डेढ़ वर्ष बॉर्डर पर रहने के बाद उच्च अधिकारियों ने उनसे कहा था कि छह माह का हिल एरिया में आपका समय शेष है। यह समय बाद में पूरा कर लेना, लेकिन मयंक ने कहा कि वह बॉर्डर पर ही रहना चाहते हैं। अति आवश्यक परिस्थितियों में ही मयंक छुट्टी लिया करते थे।
साइकिल से जाते थे कोचिंग
एनडीए का एग्जाम पास करने के लिए मयंक ने डिफेंस कॉलोनी गंगानगर में कर्नल देवगन से ट्रेनिंग ली। दिशांत ने बताया कि वह साइकिल से ही कोचिंग जाते थे।
पांचवें प्रयास में हुआ एनडीए में सेलेक्शन
मयंक एनडीए की परीक्षा तो पास कर लेते थे, लेकिन इंटरव्यू में रह जाते थे। मित्र दिशांत ने बताया कि पांचवें प्रयास में मयंक को सफलता प्राप्त हुई। पिता रिटायर्ड सूबेदार वीरेंद्र विश्नोई को मयंक अपना प्रेरणास्त्रोत मानते थे।
पिता एमए इकनॉमिक्स में 1978 में गोल्ड मेडलिस्ट रहे। बचपन से ही मयंक की सेना में जाने की इच्छा थी। मयंक के जज्बे को देखकर उसका मित्र अमन भी उन्हीं की राह पर चल पड़ा। तीनों दोस्त रनिंग, लांग जंप, हाई जंप आदि की छावनी क्षेत्र में प्रेक्टिस किया करते थे।