उत्तर प्रदेश के मेरठ में आनंद अस्पताल के एमडी हरिओम आनंद की मौत के बाद अब बड़े- बड़े राज खुलकर सामने आ रहे हैं। कई अधिकारियों समेत 97 लोगों ने अस्पताल में पैसा लगाया था। वहीं आखिर में हरिओम आनंद लगातार अपने शेयर खोते जा रहे थे, तो दूसरी तरफ उनके ऊपर कर्ज भी बढ़ रहा था। अस्पताल के शेयर धारकों की जो सूची लीक हुई है, उसके अनुसार हरिओम आनंद परिवार के पास 31 मार्च 2018 को सिर्फ 20 प्रतिशत शेयर ही बचे थे। जिसे लेकर विवाद लगातार बढ़ता गया। आगे पढ़िए पूरा अपडेट-
हरिओम आनंद आत्महत्या केस: अब खुल रहे बड़े-बड़े राज, सामने आया ये प्रमुख नाम, कई अधिकारियों ने भी लगाया था पैसा
हालांकि सूत्रों का कहना है कि बाद में यह शेयर और भी घट गए, लेकिन इसकी सूची अभी कहीं नहीं मिल रही है। 2018 के वित्तीय वर्ष शुरू होने पर आनंद अस्पताल के शेयर धारकों की जो सूची जारी हुई थी, उसमें कुल 97 शेयर धारक हैं। इनमें भी 21 नाम ऐसे हैं जो सबसे बड़े हैं। बाकी लोग बहुत ही छोटे स्तर पर हैं। इन्हीं 21 लोगों के बीच अब विवाद चल रहा था।
ये हैं प्रमुख 21 शेयर धारक
डॉ. अजय गुप्ता, हरिओम आनंद, एमबी वर्मा, मीना आनंद, मोना सिंह, डॉ. एनपी सिंह, डॉ. संजय अग्रवाल, गौतम आनंद, हरिओम आनंद एंड संस, मानसी आनंद, अनुजा चावला, कमलेश वोहरा, चिरंजीव तनेजा, सोनाक्षी तनेजा, चिराग तनेजा, दिवास तनेजा, अमन तनेजा, चरणजीत सिंह सेठी व तरणजीत सिंह सेठी पुत्र जीएस सेठी, ललित भारद्वाज, पल्लवी भारद्वाज।
इतने प्रतिशत हैं इनके शेयर
सूची के अनुसार हरिओम आनंद परिवार के पास कुल 20 प्रतिशत शेयर, सेठी परिवार के पास 25 प्रतिशत शेयर, ललित भारद्वाज के पास 15 प्रतिशत और तनेजा परिवार के पास 18.50 प्रतिशत शेयर हैं। डॉ. एनपी सिंह, डॉ. अजय गुप्ता और डॉ. संजय अग्रवाल के पास पांच-पांच प्रतिशत शेयर थे। बताया जाता है कि विवाद के बीच इन चिकित्सकों के शेयर भी सेठी परिवार ने ले लिए, हालांकि इसकी पुष्टि अभी नहीं हो रही है। ऐसे में सेठी परिवार के शेयर सबसे ज्यादा हैं।
अलग से भी उठाया था मोटा कर्ज
ये वो लोग हैं जिनके पैसे लिखित में अस्पताल के शेयर्स में नजर आते हैं। तमाम लोग ऐसे भी हैं, जिन्होंने हरिओम आनंद की साख को देखते हुए कभी कर्ज में मोटा पैसा दिया था। इसमें मुमताज कामरान ऐसा नाम है, जो उन्हें अपनी गारंटी पर पैसा उपलब्ध कराता था। पूर्व एमएलसी हरपाल सिंह सैनी के भाई समय सिंह सैनी ने भी अलग से ही कर्ज दिया था। ऐसे तमाम लोग हैं जो अब इस नंबर दो में दिए गये कर्ज के लिए अप्रत्यक्ष रूप से दबाव तो बना रहे थे, लेकिन सामने आने से बचते रहे।