मेरठ अग्निकांड के बाद पीड़ित आसिम से जब उनके परिवार के संबंध में जानकारी ली गई तो बच्चों के संबंध में जानकारी देते हुए उनकी आंखों से आंसू छलक गए। उन्होंने बताया कि आगजनी के दौरान जब वह परिवार को बचाने के लिए मकान में दाखिल हुए।
तो दूसरी मंजिल पर रुखसार ने जुड़वां बेटियों को अपने आगोश ले रखा था। वह उनके ऊपर लेटी हुई थी। उसका एक हाथ अकदस की तरफ था। अकदस अपनी मां के आगोश से निकलकर खुद को बचाने के लिए किचन में स्लिप के नीचे छुप गया था। वह यहीं पर बेसुध पड़ा मिला।
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महिला और तीन बच्चों के एक साथ उठे जनाजे में शामिल आसपास के लोग व परिजन
- फोटो : संवाद न्यूज एजेंसी
आसिम ने बताया कि सोमवार को ही रुखसार बच्चों को लेकर मायके से लौटी थी। वह उन्हें लेकर बाजार गए थे। रुखसार ने अपने कपड़े खरीदकर सिलनेे के लिए दर्जी को दिए। वहीं, बेटे के जिद करने पर उसे ऑटोमेटिक जंपिंग कार दिलाई थी।
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किदवई नगर में आग की लपटों से हुई छह मौतों के दूसरे दिन गमगीन परिजन
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अगर रुखसार बच्चों को लेकर मायके में ही रहती तो यह हादसा नहीं होता। अकदस को उन्होंने इसी वर्ष स्कूल में दाखिला कराया था। वह काफी चंचल था। हमेशा खेलता रहता था। जब भी बाजार जाता था। कुछ न कुछ दिलाने की जिद करता था। वह अक्सर नीले रंग की शर्ट पहनने की जिद करता था।
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आग से झुलसे आसिम के मरहम लगाता साथी
- फोटो : संवाद न्यूज एजेंसी
एक साथ जन्म, बीमारी और छोड़ दी दुनियां
आसिम ने बताया कि उनकी जुड़वां बच्चियों अनबिया और आयत उर्फ इनायत एक सप्ताह पहले ही बीमार पड़ी थीं। दोनों को एक साथ भर्ती कराया गया था। इससे पहले भी वह दोनों एक साथ बीमार हुईं थीं और अब एक साथ दुनियां छोड़कर चली गईं।
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मृतक बच्चे और महिला
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हादसे के बाद भी रखा रोजा
इतने बड़े हादसे के बाद भी मंगलवार को आसिम व अन्य परिजनों ने रोजा रखा। आसिम को जब मरहम लगाया जा रहा था। एक साथी ने उनसे पानी के लिए पूछा तो उनके साथी ने कह दिया। इनका रोजा है। वहीं, सोमवार को हादसे के बाद बड़ी संख्या में लोग नमाज छोड़कर मस्जिद से परिवार को बचाने के लिए दौड़ पड़े थे।