मुझे अकेला छोड़कर कहां चले गए, अब मैं कहा जाऊं क्या करूं... ये शब्द शहीद सतेंद्र कश्यप की पत्नी सोनिया ने पति के शव से लिपटकर रोते बिलखते हुए कहे तो हर किसी की आंखें नम हो गईं। बार-बार पति को रोते हुए निहारती तो हाथ लगाकर उन्हें उठाने की कोशिश भी की। गम के माहौल में पत्नी का करुण विलाप देखकर हर किसी का कलेजा फटा जा रहा था। घर-परिवार की महिलाओं ने किसी तरह उन्हें संभाला।
शहीद पति से लिपटकर बिलखती रही पत्नी, कहा- मुझे अकेला छोड़कर कहां चले गए, अब मैं कहां जाऊं...
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गांव किवाना में शहीद सतेंद्र के शव को सबसे पहले दस मिनट के लिए घर पर रखा गया, ताकि महिलाएं शहीद के अंतिम दर्शन कर सकें। शव को देखकर घर के कोने-कोने से विलाप की आवाजें आने लगीं। शहीद के अंतिम दर्शन के लिए महिलाएं उमड़ पड़ीं।
वहीं महिला थाना प्रभारी नीरज चौधरी ने महिला पुलिसकर्मियों के साथ महिलाओं को समझाकर व्यवस्था संभाली। इस दौरान पत्नी सोनिया शहीद पति का चेहरा देखकर बिलख पड़ी। महिलाओं ने किसी तरह उसे संभाला। इसके बाद महिलाएं चौपाल में भी शहीद को श्रद्धांजलि देने पहुंचीं।
मेरा भाई शेर है, हमें ऐसे छोड़कर नहीं जा सकता
शहीद सतेंद्र कश्यप के पार्थिव शरीर को देखकर बहन राखी और रेखा खूब रोईं। बिलखते हुए कहा कि मेरा भाई तो शेर है, ऐसे छोड़कर नहीं जा सकता। पिता मुनीराम भी बेटे के शव को देखकर अपने आंसू नहीं रोक पाए। शहीद सतेंद्र का साला निरपुड़ा निवासी मनीष भी बहनोई का शव देखकर बिलखता रहे।
युवाओं ने बाइक पर निकाली तिरंगी यात्रा
शहीद सतेंद्र कश्यप के सम्मान में युवाओं ने गांव में बाइक पर तिरंगा यात्रा निकाली। इसके बाद गांव से बाहर नदी के पुल पर खड़े हो गए। जब शहीद का शव पहुंचा तो युवक उसके पीछे-पीछे नारे लगाते हुए बाइक पर तिरंगा लेकर चलते रहे। युवाओं में देशभक्ति का जुनून अलग ही नजर आ रहा था।
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