महाभारत कालीन ऐतिहासिक नगरी में मौजूद प्राचीन पांडेश्वर महादेव मंदिर व प्राचीन जयंती माता शक्तिपीठ मंदिर पर महाशिवरात्रि के अवसर पर श्रद्धालुओं का सैलाब उमड़ पड़ा।
महाशिवरात्रि के अवसर पर पांडव टीले पर मौजूद प्राचीन जयंती माता शक्तिपीठ मंदिर, प्राचीन पांडेश्वर महादेव मंदिर में क्षेत्र के लाखों श्रद्धालुओं ने पवित्र जल से भगवान भोलेनाथ का जलाभिषेक किया।
2 of 5
मंदिर में लगी शिवभक्तों की लंबी लाइन।
- फोटो : अमर उजाला
इस अवसर पर शनिवार सुबह से दोपहर तक लंबी-लंबी लाइनों में लगकर श्रद्धालु भगवान भोलेनाथ के जलाभिषेक के लिए पहुंचे। जिन्होंने प्राचीन पांडेश्वर महादेव मंदिर में जलाभिषेक किया और उसके बाद पांडव टीले पर मौजूद प्राचीन जयंती माता शक्तिपीठ मंदिर पर मौजूद बाबा भोलेनाथ की प्रतिमा पर जलाभिषेक कर जयंती माता के दर्शन किए। इस अवसर पर मंदिरों पर विशाल भंडारे आयोजित किए गए, जिसमें हजारों श्रद्धालुओं ने शामिल होकर धर्म लाभ अर्जित किया।
3 of 5
जलाभिषेक करने पहुंचे शिवभक्त।
- फोटो : अमर उजाला
पांडेश्वर महादेव मंदिर से जुड़ी है लाखों लोगों की आस्था
महाभारत कालीन ऐतिहासिक नगरी में मौजूद प्राचीन पांडेश्वर महादेव मंदिर से क्षेत्रीय नहीं देश-विदेश के लाखों लोगों की आस्था जुड़ी हुई है। वे यहां समय-समय पर आकर भगवान भोलेनाथ को जलाभिषेक करते हैं और पूजा-अर्चना कर अपने परिवार की सुख-सलामती के लिए मन्नत मांगते हैं। आज महाशिवरात्रि के अवसर पर लाखों लोगों ने यहां पहुंचकर जलाभिषेक किया और मन्नतें मांगीं।
4 of 5
शिवभक्त।
- फोटो : अमर उजाला
पांडवों की कुलदेवी मानी जाती है जयंती माता
पांडव टीले पर मौजूद प्राचीन जयंती माता शक्तिपीठ मंदिर के अध्यक्ष सुदेश कुमार ने बताया कि पांडव टीले के समीप स्थित प्राचीन पांडेश्वर महादेव मंदिर के बाद पांडव टीले पर मौजूद प्राचीन जयंती माता के दर्शन करने से ही श्रद्धालुओं की मन्नत पूरी होती है। उन्होंने बताया कि प्राचीन जयंती माता शक्ति पीठ मंदिर में माता की प्राकृतिक प्राचीन पिंडी स्वरूप स्थित है, जिसके दर्शन के लिए हर रोज सैकड़ों पर्यटक सैलानी यहां आते हैं।
5 of 5
मंदिर में लगी लंबी लाइन।
- फोटो : अमर उजाला
बताया गया कि शिवरात्रि के अवसर पर यहां लाखों लोग मंदिर परिसर में दर्शन के लिए पहुंचते हैं। महाशिवरात्रि के अवसर पर भी श्रद्धालुओं ने माता की पूजा-अर्चना की और भगवान भोलेनाथ की प्रतिमा पर जलाभिषेक किया। इसके बाद प्रसाद ग्रहण किया।