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ऐतिहासिक धरोहर: यहां हर रोज सवा मन सोना दान करते थे महावीर कर्ण, आज भी मौजूद हैं साक्ष्य

Wed, 20 Nov 2019 06:05 PM IST
Dimple Sirohi न्यूज डेस्क, अमर उजाला, हस्तिनापुर
न्यूज डेस्क, अमर उजाला, हस्तिनापुर Published by: Dimple Sirohi Updated Wed, 20 Nov 2019 06:05 PM IST
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Mahadani karna donated lots of Gold daily on this place of Hastinapur Meerut
कर्ण घाट मंदिर हस्तिनापुर - फोटो : अमर उजाला

ऐतिहासिक नगरी हस्तिनापुर में महाभारत के कई साक्ष्य आज भी विद्यमान हैं। इनमें कर्ण घाट मंदिर भी है। यह देश-विदेश तक प्रसिद्ध है। यहां हर रोज बड़ी संख्या में लोग दर्शन करने आते हैं।


 

मान्यता है कि कर्ण घाट मंदिर में योद्धा कर्ण मां कामाख्या देवी की कठिन तपस्या करते थे। मंदिर से कुछ दूर गुप्त रूप से आहुति देते थे। इसके बाद मां कामाख्या प्रसन्न होकर उन्हें सोना प्रदान करती थीं। इसी प्रकार वह हर रोज कठिन तपस्या के बाद सवा मन सोना प्रतिदिन दान किया करते थे।


 
Mahadani karna donated lots of Gold daily on this place of Hastinapur Meerut
कामाख्या देवी मां का मंदिर - फोटो : अमर उजाला

मान्यता है कि जिस स्थान पर बैठकर कर्ण लोगों को सोना दान करते थे। वहां 2012 में दीपावली के अवसर पर शिवलिंग की पुन: स्थापना की गई। ऐसा माना जाता है कि समीप ही कामाख्या देवी मां का मंदिर था। यह आज जीर्ण-शीर्ण अवस्था में है। यह जीर्णोद्धार की बाट जोह रहा है। इस मंदिर का कुछ हिस्सा धरती में समा गया है। 

Mahadani karna donated lots of Gold daily on this place of Hastinapur Meerut
हस्तिनापुर - फोटो : अमर उजाला

वहीं, कर्ण मंदिर का यह स्वरूप स्वामी शंकर देव जी की अनन्य भक्ति, सेवा और परिश्रम का फल है। उन्होंने कठिन परिश्रम करके इस पौराणिक स्थान को श्रद्धालुओं के दर्शनों के लिए बचाकर रखा है। कर्ण मंदिर बूढ़ी गंगा के पुल के समीप स्थित है।

माना जाता है कि महाभारत काल में गंगा इसी घाट से होकर गुजरती थीं। गंगा जी का प्रवाह इस स्थान से दूर हो जाने की वजह से अब इस विलुप्त प्राय धारा को बूढ़ी गंगा के नाम से जाना जाने लगा है। 

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Mahadani karna donated lots of Gold daily on this place of Hastinapur Meerut
हस्तिनापुर - फोटो : अमर उजाला

दुर्योधन ने यहां पाई थी अपार शक्ति
महंत शंकर देव जी बताते हैं कि यह घटना पुराणों में दर्ज है। जिस समय पांडव अज्ञातवास को भोग रहे थे। दुर्योधन ने भीष्म पितामह एवं द्रोणाचार्य से अश्वमेध यज्ञ करने की इच्छा जाहिद की। इस पर उन्होंने दुर्योधन से कहा कि तुम्हें इसका अधिकार नहीं है। यह अधिकार सिर्फ राज्य के राजकुमार को होता है। यहां का राजकुमार युधिष्ठर है। इसलिए युधिष्ठर ही यह अनुष्ठान कर सकते हैं।

इसके बाद दुर्योधन ने भीष्म पितामह और द्रोणाचार्य की आज्ञा से मां कामाख्या देवी मंदिर में विष्णु महायज्ञ किया। इससे वह बहुत शक्तिशाली हो गया। फिर उसने कर्ण की मदद से राजाओं को जीतकर उनके मुकुट धृतराष्ट्र के चरणों में लाकर डाल दिए थे।

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Mahadani karna donated lots of Gold daily on this place of Hastinapur Meerut
hastinapur - फोटो : अमर उजाला

कर्ण मंदिर में गोशाला सेवा
कर्ण मंदिर के समीप महंत शंकरदेव जी महाराज ने गोशाला का निर्माण कराया। इसमें क्षेत्र के भटकने वाली गायों को यहां बांधकर निजी खर्च से उनका पालन-पोषण कर रहे हैं। महाराज ने बताया कि इस समय गोशाला में करीब 20 गोवंश मौजूद हैं। जिनकी वह तन-मन से सेवा कर रहे हैं।

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