जब रोग हरता है तो अमृत कहलाता है। फिर वह सिर्फ साधारण पानी नहीं बल्कि आम जन की आस्था की धारा बन जाता है। करीब पांच हजार वर्ष पहले नागराज वासुकी का कुष्ठ रोग दूर करने वाले अमृत कूप का जल अचला के गर्भ में चला गया। जब तक कूप में जल था, वहां लोग स्नान करते थे। इस कूप के रसातल में नवलदेह की कहानी सोई हुई है।
महाभारत सर्किट: परीक्षितगढ़ को अमृतमयी कूप, जिसमें झांकने पर ताजा हो जाती हैं पुरातन कथाएं
रैना पालीवाल, अमर उजाला, मेरठ
Published by: Dimple Sirohi
Updated Mon, 02 Mar 2020 12:17 PM IST
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