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'जाट रेजीमेंट' के आगे आज भी थर्राता है दुश्मन, 1971 के युद्ध में पाकिस्तान का किया था कुछ ऐसा हाल

Mon, 04 Feb 2019 06:04 PM IST
कपिल kapil न्यूज डेस्क, अमर उजाला, मेरठ
न्यूज डेस्क, अमर उजाला, मेरठ Published by: कपिल kapil Updated Mon, 04 Feb 2019 06:04 PM IST
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Jat Regiment is the Biggest and best regiment of indian army some unknown fact about it
जाट रेजीमेंट

मेरठ कैंट स्थित अब्दुल हमीद सैनिक इंस्टीट्यूट में छह जाट बटालियन का 49वां स्थापना दिवस मनाया गया। सेना की सर्वश्रेष्ठ रेजीमेंट में से एक 'जाट रेजीमेंट' की छठी बटालियन की तरफ से सोमवार को पाइन वार मेमोरियल पर शहीदों को श्रद्धांजलि दी गई। वेटरंस और वीर नारियों का सम्मान भी किया गया। समारोह में बटालियन के सेवानिवृत्त अधिकारी, जेसीओ और अन्य रैंक के अधिकारी भी शामिल हुए।



गौरतलब है कि यहा सेना की सर्वश्रेष्ठ रेजीमेंट है। प्रथम विश्वयुद्ध में इसे रॉयल के टाइटल से सम्मानित किया गया। आइए जानते हैं आखिर क्यों भारतीय सेना अपनी इस खास रेजीमेंट पर करती है नाज़:-

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जाट रेजीमेंट

‘जाट रेजीमेंट’ भारतीय सेना की एक पैदल सेना रेजीमेंट है। यह सेना की सबसे पुरानी और सबसे ज्यादा वीरता पुरस्कार विजेता रेजीमेंट है। रेजीमेंट ने वर्ष 1839-1947 के बीच 19 और स्वंत्रता के पश्चात आठ महावीर चक्र, आठ कीर्ति चक्र, 32 शौर्य चक्र, 39 वीर चक्र और 170 सेना पदक सहित अनेक शौर्य सम्मान प्राप्त किये हैं। अपने 200 साल से भी ज्यादा की समयसीमा में रेजीमेंट ने पहले और दूसरे विश्व युद्ध सहित भारत और विदेशों में अनेक युद्धों में भाग लिया है। 

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जाट रेजीमेंट

माना जाता है कि रेजीमेंट की शुरुआत 1795 में ‘कलकत्ता नेटिव मिलट्री’ द्वारा की गई थी, जो बाद में बंगाल सेना की एक इन्फेंट्री बटालियन बन गई। उधर भारत में सत्ता और प्रभुत्व की तलाश में जाटों के साथ संघर्ष में आए ब्रिटिशों ने नोटिस किया कि सिखों के बाद जाटों ने उन्हें सबसे ज्यादा परेशान किया। वे जाटों के सैनिक के गुणों और दम ख़म से इतने प्रभावित हुए कि उन्हें बंगाल सेना में भर्ती करना शुरू किया। 1803 में 22 वीं ‘बंगाल नेटिव इन्फैंट्री’ की पहली बटालियन का गठन किया गया। दूसरी और तीसरी बटालियन 1817 और 1823 में बनाई गई। जनवरी 1922 में, भारतीय सेना की 9 वीं जाट रेजीमेंट का गठन किया गया।


 
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जाट रेजीमेंट

एक रहकर संघर्ष करना ही ‘जाट रेजीमेंट’ की पहचान है। इसीलिए ‘संगठन और वीरता’इस रेजीमेंट का आदर्श वाक्य है। यह रेजीमेंट जब युद्ध के मैदान में उतरती है तो ‘जाट बलवान, जय भगवान’का नारा लगाती है। रेजीमेंट का लोगो रोमन में अंक नौ यानी नाइन है जो रेजीमेंट की नौंवी बटालियन का प्रतिनिधित्व करता है इस अंक के ऊपर की ओर ‘सत्यमेव जयते’ अंकित है।


 
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जाट रेजीमेंट

वर्तमान में रेजीमेंट की 23 बटालियन हैं। प्रत्येक बटालियन में साढ़े आठ सौ सैनिक होते हैं। इस रेजीमेंट में मुख्यतः पश्चिमी उत्तर प्रदेश, हरियाणा, राजस्थान और दिल्ली के हिन्दू जाट समुदाय से भर्ती की जाती है। यानी रेजीमेंट में तकरीबन 96 प्रतिशत जाट हैं तथा एक बटालियन में अहीर, गुर्जर और राजपूत सभी को शामिल किया गया है। रेजीमेंट का मुख्यालय बरेली उत्तर प्रदेश में है।

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