देवबंद में जमीयत उलमा-ए-हिंद के राष्ट्रीय अधिवेशन में सीधे नाम तो नहीं लिया लेकिन संघ और सरकार उलमा के निशाने पर रही। नसीहत दी गई तो साथ ही चेताया भी गया। संबोधन के दौरान मौलाना महमूद मदनी ने कहा कि अपने ही मुल्क में अजनबी बना दिए गए हैं। हमारे पूर्वजों ने देश को आजाद कराने में बड़ी कुर्बानियां दी हैं। हम सांप्रदायिक शक्तियों को देश की अस्मिता से खिलवाड़ नहीं करने देंगे।
Deoband: उलमा के निशाने पर संघ और सरकार, नसीहत देकर चेताया, मदनी बोले-संप्रदायिक शक्तियों के मंसूबे..
मौलाना मदनी ने मंच से उठाए सवाल
मौलाना मदनी ने सवाल खड़ा किया कि देश की एकता और अखंडता व अखंड भारत बनाने की बात करने वालों ने आज देश के मुसलमानों का रास्ते पर चलना मुश्किल कर दिया है, यह किस अखंडता और अखंड भारत की बात करते हैं? यह नफरती लोग देश के साथ दुश्मनी कर रहे हैं और देश के अमन शांति, यहां की गंगा-जमुनी तहजीब और एकता, अखंडता को तबाह, बर्बाद कर रहे हैं। उन्होंने कहा कि हमें सबसे ज्यादा प्यार इस देश की शांति से है। नफरत की दुकान खोलने वाले और नफरत का बाजार सजाने वाले लोग देश के दुश्मन हैं।
नफरत को दूर करना सरकार और मीडिया की भी जिम्मेदारी
उन्होंने कहा कि जमीयत उलमा-ए-हिंद भारत के मुसलमानों की दृढ़ता का प्रतीक है, यह सिर्फ मुसलमानों तक ही सीमित नहीं है, बल्कि यह देश का संगठन है। उन्होंने कहा कि सांप्रदायिक नफरत को दूर करना मुसलमानों से कहीं अधिक सरकार और मीडिया की जिम्मेदारी है। इससे पूर्व जमीयत के पदाधिकारियों ने देश और समाज के मुद्दों पर प्रस्ताव पेश किए, जिनका अनुमोदन भी किया गया। इन प्रस्तावों के जरिये देश की समस्याओं के समाधान के लिए एक रूपरेखा देने का प्रयास किया गया।
मंच पर नम हुईं मौलाना महमूद मदनी की आंखें
अधिवेशन के पहले दिन भाषण शुरू करने मंच पर पहुंचे मौलाना महमूद मदनी भावुक हो गए। उन्होंने नम आंखों के साथ संगठन के पूर्व अध्यक्ष दिवंगत मौलाना कारी मोहम्मद उस्मान मंसूरपुरी को याद किया। मौलाना मदनी ने कहा कि यह पहला अवसर है, जब कारी मोहम्मद उस्मान मंसूरपुरी के बिना यह कार्यक्रम करना पड़ा है। हमेशा वो ही जमीयत का झंडा फहराते थे और वही कार्यक्रम की अध्यक्षता करते थे। उनके दुनिया से रुखसत होने से इस्लामिक जगत के साथ ही जमीयत को बहुत बड़ा नुकसान हुआ है। क्योंकि कारी उस्मान ने हमेशा उनका सही मार्गदर्शन किया है।
दूसरे दिन सरकार पर साधा निशाना
मौलाना मदनी ने सरकार पर निशाना साधते हुए कहा कि वे जरा-जरा सी बात पर हमे कहते हैं पाकिस्तान चले जाओ, अरे तुम्हें मौका नहीं मिला था पाकिस्तान जाने का। हमें मौका मिला लेकिन हमने रिजेक्ट कर दिया था। अधिवेशन में ज्ञानवापी मस्जिद, मथुरा शाही ईदगाह और कॉमन सिविल कोड को लेकर प्रस्ताव पारित किए गए। जिसका अधिवेशन में मौजूद उलमा ने खुले दिल से समर्थन किया। कहा कि कॉमन सिविल कोड को बर्दाश्त नहीं किया जाएगा इसका हर स्तर पर विरोध किया जाएगा।
शाहजहांपुर के प्रोफेसर मौलाना नौमानी ने कॉमन सिविल कोड का प्रस्ताव रखते हुए इसके पीछे सरकार की मंशा को जाहिर करते हुए कहा कि मुस्लिम पर्सनल लॉ को समाप्त करने के लिए सरकार इसको ला रही है। जिसे किसी कीमत पर बर्दाश्त नहीं किया जाएगा। उन्होंने कहा कि मुल्क का कानून सबको बराबर का हक देता है। यदि सरकार कॉमन सिविल कोड को जबरन लाती हर तरह का विरोध किया जाएगा।